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17 साल से ‘विष उतारने’ का दावा, बिना फीस उपचार कर रहे सिरमौर के शमशेर राणा, दूर-दूर तक इनकी चर्चा

सूचना प्रौद्योगिकी के आधुनिक युग में जहां हर चीज को सरल व सुविधाजनक बना दिया गया है, वहीं बदलते परिवेश में भी असंख्य लोग रूढ़िवादिता और जादू टोना के जंजाल के फंसे हैं। इतना जरूर है कि जब किसी व्यक्ति को मेडिकल साइंस से भी बीमारी में कोई आराम नहीं मिलता है तो वह तांत्रिक की शरण में जाता है, जहां उन्हें राहत मिलती है।

राजगढ़ : सूचना प्रौद्योगिकी के आधुनिक युग में जहां हर चीज को सरल व सुविधाजनक बना दिया गया है, वहीं बदलते परिवेश में भी असंख्य लोग रूढ़िवादिता और जादू टोना के जंजाल के फंसे हैं। इतना जरूर है कि जब किसी व्यक्ति को मेडिकल साइंस से भी बीमारी में कोई आराम नहीं मिलता है तो वह तांत्रिक की शरण में जाता है, जहां उन्हें राहत मिलती है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या शिक्षित वर्ग की है।

गौर रहे कि गिरि नदी के दोनों ओर बसे सिरमौर और शिमला जिला के गांव-गांव में विष नाम के काला जादू बारे लोग काफी ग्रसित व भ्रमित हैं। विष उतारने के लिए राजगढ़ की पझौता घाटी के गांव शाया सनौरा निवासी शमशेर राणा बीते 17 वर्षों से निःशुल्क समाज सेवा कर रहे हैं। इनके पास प्रतिदिन विष से पीड़ित लोग काफी संख्या में ईलाज करवाने आते हैं। मंगलवार, शनिवार और रविवार को इनके पास काफी भीड़ रहती है। सबसे अहम बात यह हैं कि शमशेर राणा इस कार्य की कोई फीस नहीं लेते।

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शमशेर राणा का कहना है कि अतीत से लेकर विष नाम का काला जादू उतराखंड के एक क्षेत्र में प्रचलित है और अब इसका प्रभाव जिला सिरमौर और शिमला के ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच गया है। विष से पीड़ित व्यक्ति को घबराहट, भूख न लगना, दिन भर सोए रहना, रात्रि को बुरे बुरे स्वप्न आना इत्यादि लक्षण होते हैं।

उन्होंने बताया कि विष निकालने की विद्या उन्होंने उत्तराखंड क्षेत्र में ही एक तांत्रिक से सीखी थी,  जिसके लिए उन्होंने 27 दिन तक कठिन व भयावह साधना गुरू के सानिध्य में की थी। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग अपने शत्रु को परेशानी में डालने के लिए विष जैसी तरकीब अपनाते हैं। शत्रु का नाम लेकर शातिर लोग हिंदू महीने के 10 गते और 20 गते को इसका प्रयोग करते हैं, जिससे व्यक्ति विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।

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उन्होंने बताया कि उनके द्वारा विष से पीड़ित ऐसे रोगी भी ठीक किए हैं जो कई-कई दिन तक अस्पताल में एडमिट होने के बावजूद भी ठीक नहीं हुए थे। उन्होंने बताया कि विष के रूप में आदमी को शमशान की राख को खिलाया जाता है अथवा इस राख का प्रयोग किसी ने चीज में किया जाता है।

शमशेर ने बताया कि वह फोन पर विष के होने या न होने की पुष्टि करते हैं। विष का प्रभाव होने पर पीड़ित व्यक्ति को जौ के कुछ दाने पुड़िया में दिए जाते हैं, जिसे घर में पानी में डालकर एक सप्ताह तक पीना होता है। इसके अतिरिक्त वह घर की मिट्टी देखने, वास्तु दोष, पितृदोष और विशेषकर महिलाओं की कोख को खोलना, नारसिंह जैसे वीर का भी उपचार करते हैं। उन्होंने सलाह देते हुए कहा कि अनजान लोगों के घर में कभी हिंदू मास के 10 व 20 गते कभी कुछ नहीं खाने का परहेज करना चाहिए, चूंकि विष देने के यह विशेष दिन होते हैं।

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Aapki Baat News Desk
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