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जमटा के जंगलों में भड़की भीषण आग, 80 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित, दहशत में कटी ग्रामीणों की रात, तड़के पाया काबू

प्रचंड गर्मी की तपिश के बीच वनों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। वन मंडल नाहन की जमटा रेंज के जंगल आग से दहक रहे हैं। नावणी क्षेत्र में जंगलों को आग से भारी नुकसान हुआ है। नावणी और जमटा क्षेत्र के लोगों के लिए बीती रात किसी दहशत से कम नहीं रही।

नाहन : प्रचंड गर्मी की तपिश के बीच वनों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। वन मंडल नाहन की जमटा रेंज के जंगल आग से दहक रहे हैं। नावणी क्षेत्र में जंगलों को आग से भारी नुकसान हुआ है। नावणी और जमटा क्षेत्र के लोगों के लिए बीती रात किसी दहशत से कम नहीं रही। हालांकि, घंटों की मशक्कत के बाद शनिवार तड़के 4 बजे आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन अब फिर से जंगल सुलगने शुरू हो गए हैं।

बता दें कि धारटीधार क्षेत्र की जमटा रेंज में चीड़ के जंगल हैं। ऐसे में ये क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में आता है। गत शुक्रवार दोपहर बाद करीब 1:30 बजे सतना खाले में भड़की आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और लगभग 70 से 80 हेक्टेयर जंगल को अपनी चपेट में ले लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

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शाम होते-होते आग नावणी के जंगलों से निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी, जिससे पूरे क्षेत्र में खौफ का माहौल बन गया। नावणी क्षेत्र में दर्जनों परिवार रहते हैं और आसपास के इलाकों में भी आग फैलने का खतरा मंडराने लगा था। रातभर लोगों में दहशत बनी रही कि कहीं आग उनके घरों तक न पहुंच जाए। हालांकि स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए रात के समय ही आग को घरों की ओर बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाई।

इस दौरान जंगल में उठती आग की लपटें और धुएं के गुबार दूर-दूर से साफ नजर आ रहे थे, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता था। वन विभाग के कर्मचारी पूरी रात मौके पर डटकर आग बुझाने में जुटे रहे। आग की सूचना मिलते ही फायर टीम भी मौके पर पहुंची और राहत कार्य में सहयोग किया। आग को बुझाने के दौरान तेज हवाओं ने आग में घी डालने का काम किया और आग तेजी से जंगल की ओर फैली।

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वन विभाग के अनुसार आग मुख्य रूप से ग्राउंड फायर थी, जिससे बड़े पेड़ों को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ, लेकिन झाड़ियां और वन विभाग की नावणी में प्लांटेशन को भारी क्षति पहुंची है। प्रभावित क्षेत्र में दाड़ू, कचनार, शीशम और अन्य प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे, जिन्हें नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने आग बुझाने में सहयोग किया।

वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रेम सिंह कंवर ने बताया कि यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहां चीड़ के जंगल अधिक हैं, जिससे आग तेजी से फैलती है और उसे नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जंगलों में आग लगाने से बचें। उन्होंने चेताया कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी आग का रूप ले सकती है, जिससे न केवल वन संपदा बल्कि वन्यजीवों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

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उन्होंने बताया कि सुबह 4 बजे आग पर काबू पा लिया था। इस दौरान फॉरेस्ट गार्ड, फायर वॉचर, वन मित्र और फायर ब्रिगेड की टीम शामिल रही, जिसमें कीर्ति कुमार, अनुज, सुखचैन, सचिन और नताशा समेत कई कर्मियों ने आग पर काबू पाने में अहम योगदान दिया।

Aapki Baat News Desk
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