धौलाकुआं में छात्रों को मिला बागवानी का लाइव अनुभव, सीखी फल और फूलों की वैज्ञानिक खेती

प्रशिक्षण के दौरान सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विस्तार) डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को गेंदा, डेहलिया, जंगली शोभाकार पौधों और शीतकालीन वार्षिक पुष्पीय फसलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

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धौलाकुआं : क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं में वैज्ञानिकों द्वारा तीन दिवसीय कार्यस्थल प्रशिक्षण एवं पूर्व-व्यावसायिक अनुभव भ्रमण का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूली विद्यार्थियों को फल एवं पुष्पीय फसलों की वैज्ञानिक खेती का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। यह कार्यक्रम 15 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बागवानी के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि आधारित करिअर विकल्पों से जोड़ना रहा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कफोटा के कक्षा 10वीं और 11वीं के 51 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कृषि व्यावसायिक अध्यापिका रीना देवी पुंडीर के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने अनुसंधान केंद्र में विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों में सहभागिता की।

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शनिवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बोहलियों के कक्षा 6वीं से 8वीं तक के 70 विद्यार्थियों का पूर्व-व्यावसायिक शैक्षिक भ्रमण भी क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया। इस दौरान संकाय सदस्य विक्रम सिंह (पीटीआई), पूनम कुमारी (टीजीटी), प्रीति (वीटी–रिटेल) और प्रियंका ठाकुर (वीटी–आईटी) उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विस्तार) डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को गेंदा, डेहलिया, जंगली शोभाकार पौधों और शीतकालीन वार्षिक पुष्पीय फसलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शोभाकार पौधों के महत्व, उनकी पहचान, प्रवर्धन की विधियों और अंतर-सांस्कृतिक क्रियाओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया। विद्यार्थियों को अनुसंधान केंद्र में अपनाई जा रही वैज्ञानिक खेती पद्धतियों से भी अवगत कराया गया।

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डॉ. शिल्पा ने साइट्रस, आम, लीची और ड्रैगन फ्रूट जैसी उपोष्णकटिबंधीय फल फसलों पर जानकारी देते हुए उनके प्रवर्धन और बाग प्रबंधन की तकनीकों पर विशेष जोर दिया। वहीं, डॉ. सिमरन कश्यप ने फोलिएज और पुष्पीय लैंडस्केप पौधों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया, जिसमें प्रवर्धन तकनीकों का प्रदर्शन, क्यारियों में शीतकालीन वार्षिक पौधों का रोपण तथा गमलों में रोपण और पुनः रोपण की गतिविधियां शामिल रहीं। प्रशिक्षण को सफल बनाने में क्षेत्र सहायक ग्रेड–1 राकेश ने भी सक्रिय सहयोग दिया। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक चर्चा के साथ किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए प्रशिक्षण के प्रति गहरी रुचि और संतोष व्यक्त किया।

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