श्री रेणुकाजी : रेणुका बांध परियोजना को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि वन विभाग द्वारा दोबारा पेड़ों की गिनती ऐसे स्थानों पर की जा रही है, जहां पेड़ों की संख्या कम है, ताकि पर्यावरण मंत्रालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में कम पेड़ दर्शाए जा सकें।
समिति ने इस पूरे मामले पर सवाल उठाते हुए आगामी चार से पांच दिनों के भीतर उचित कार्रवाई न होने पर डीएफओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्हें मीटिंग के लिए HPPCL के जीएम द्वारा बुलाया गया था, लेकिन बैठक में पहुंचने पर पता चला कि वन विभाग दोबारा पेड़ों की गिनती कर रहा है।
समिति का आरोप है कि दोबारा गिनती किए जाने का मतलब साफ है कि पहले पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी नहीं थी, जिसके चलते समिति द्वारा डीएफओ को शिकायत पत्र देने के बाद कार्य बंद हुआ था।
समिति के अनुसार पेड़ों की गिनती के दौरान 20*20 मीटर के पैच नापे जा रहे थे और उन्हीं में पेड़ों की काउंटिंग की जा रही थी। आरोप लगाया गया कि ऐसे पैच चुने जा रहे थे जहां पेड़ कम हैं। समिति के सामने गिने गए दो पैच में क्रमशः 35 और 42 पेड़ पाए गए। समिति का कहना है कि यदि किसी पैच में इससे कम पेड़ दिखाए जाते हैं तो वन विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आएगी।
समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने यह भी कहा कि उनकी बैठक डीएफओ रेणुका से होनी थी, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया और कार्यालय भी नहीं पहुंचे। एक बार कॉल उठाने पर उन्होंने खुद को जंगल में पेड़ों की गिनती में व्यस्त बताया और फोन काट दिया।
रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय प्रधान के नेतृत्व में हुई बैठक में समिति ने डीएफओ से सवाल किया कि 11 तारीख को शिकायत के बाद बंद कराए गए कार्य को लेकर क्या किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज की गई और बिना अनुमति बड़े स्तर पर पेड़ काटे जाने पर क्या कार्रवाई हुई।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि चार-पांच तारीख तक उचित कार्रवाई नहीं हुई तो बांध कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी समिति के सचिव योगी ठाकुर ने साझा की।
