नाहन : साइबर ठगी के बढ़ते मामलों और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर पैसे ऐंठने वाले जालसाजों से बचने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) सिरमौर ने गुरुवार को नाहन कोर्ट स्टाफ के लिए विशेष जागरूकता शिविर लगाया।
शिविर में पुलिस विभाग के साइबर अपराध विशेषज्ञों ने कोर्ट स्टाफ को साइबर फ्रॉड के नए और बदलते तरीकों की जानकारी देने के साथ यह भी स्पष्ट किया कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी व्यवस्था या प्रक्रिया नहीं है।
DLSA सिरमौर के सचिव नव कमल की मौजूदगी में आयोजित शिविर में साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते हैं।
इसके बाद किसी केस में नाम आने, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य अपराध में फंसने का डर दिखाकर लोगों पर दबाव बनाया जाता है और उनसे पैसे की मांग की जाती है।
वीडियो कॉल पर कोई एजेंसी नहीं करती गिरफ्तार
साइबर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करती। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने वाला फोन या वीडियो कॉल साइबर ठगी का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय कॉल करने वाले की पहचान और उसकी बातों की सत्यता जांचना जरूरी है।
OTP और बैंक की जानकारी साझा न करें
शिविर में कोर्ट स्टाफ को साइबर सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सावधानियां भी बताई गईं। किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते की जानकारी, OTP या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं और जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
साइबर ठगी का शिकार होने पर पीड़ित को देरी किए बिना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि ठगी की जानकारी जितनी जल्दी संबंधित एजेंसियों तक पहुंचेगी, उतनी ही जल्दी कार्रवाई की संभावना बढ़ती है।
DLSA सिरमौर के सचिव नव कमल ने कहा कि साइबर अपराधी रोजाना ठगी के नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कोर्ट स्टाफ से आग्रह किया कि शिविर में मिली जानकारी को अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग साइबर ठगी के जाल से बच सकें।
शिविर के अंत में नाहन कोर्ट स्टाफ ने साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल भी विशेषज्ञों के सामने रखे। पुलिस विभाग के साइबर विशेषज्ञों ने सवालों के जवाब देकर कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान किया।
