नाहन : जिस आंगन से कभी बेटियों की डोली उठी थी, उसी घर में उनकी चिताएं सुलग उठीं। लोहड़ी और माघी की खुशियों से गूंज रहा तलंगाना गांव का यह घर पल भर में मातम में बन गया। तड़के करीब तीन बजे लगी भीषण आग में एक बूढ़ी मां की आंखों के सामने पूरा परिवार राख हो गया और वह बेबस चीखती रह गई। जिला सिरमौर के नौहराधार तहसील के तलंगाना गांव में हुआ यह हादसा माघी पर्व को हमेशा के लिए खौफनाक याद में बदल गया।

इस दर्दनाक अग्निकांड में इंद्रा देवी ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी खो दी। उनकी दो बेटियां, एक दामाद और तीन नाते-नातिन आग की भेंट चढ़ गए, जबकि एक अन्य दामाद गंभीर रूप से झुलस गया। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक त्योहार की रौनक थी, वहीं कुछ ही मिनटों में सब कुछ खाक हो गया।

हादसे में इंद्रा देवी की बेटी तृप्ता देवी और दामाद नरेश कुमार निवासी टपरोली, दूसरी बेटी कविता पत्नी लोकेंद्र निवासी गांव विजर, नेरवा, तहसील चौपाल जिला शिमला और उनके तीन बच्चे 9 वर्षीय सारिका, 13 वर्षीय कृतिका और 3 वर्षीय कार्तिक की जिंदा जलने से मौत हो गई। कविता के पति लोकेंद्र इस हादसे में बुरी तरह झुलस गए हैं, जिनका क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में उपचार चल रहा है।
बताया जा रहा है कि इंद्रा देवी की दोनों बेटियां अपने-अपने परिवार के साथ लोहड़ी और माघी पर्व मनाने के लिए मायके तलंगाना गांव आई थीं। घर में खुशी का माहौल था और त्योहार की तैयारियां चल रही थीं। किसी को अंदेशा तक नहीं था कि यह उत्सव उनके जीवन का आखिरी पर्व बन जाएगा। तड़के अचानक मकान में आग भड़क उठी और कुछ ही पलों में लपटों ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया।

निचली मंजिल पर मौजूद इंद्रा देवी किसी तरह जान बचाकर बाहर निकल आईं और शोर मचाकर ग्रामीणों को मदद के लिए पुकारा, लेकिन जब तक आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी। ऊपरी मंजिल पर फंसे परिवार के सदस्य बाहर नहीं निकल सके और पूरा मकान देखते ही देखते जलकर राख हो गया। मां अपनी आंखों के सामने अपनों को जलते देखती रह गई और कुछ भी नहीं कर सकी।

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब श्री रेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र पहले से ही गहरे सदमे में है। इससे पहले 9 जनवरी को हरिपुरधार में माघी पर्व के लिए शिमला से लौट रहे यात्रियों की निजी बस दुर्घटना में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। महज एक सप्ताह के भीतर हुए इन दो बड़े हादसों ने पूरे गिरिपार क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। समूचा शिमला और सिरमौर में शोक की लहर है। गांव से लेकर आसपास के इलाकों तक मातम पसरा हुआ है और हर आंख नम है।



