अपना बस रूट बंद होने से बचाने एसडीएम के पास पहुंचे पच्छाद की 5 पंचायतों के लोग, बोले- HRTC की बस आवागमन का मुख्य साधन

हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार के गृह विधानसभा क्षेत्र पच्छाद के घिनीघाड़ इलाके की 5 पंचायतों के लोगों ने सरकारी बस सेवा को बंद न करने की मांग को लेकर एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन सौंपने वालों में करीब तीन दर्जन ग्रामीण शामिल रहे।

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सराहां : हिमाचल निर्माता डॉ. वाईएस परमार के गृह विधानसभा क्षेत्र पच्छाद के घिनीघाड़ इलाके की 5 पंचायतों के लोगों ने सरकारी बस सेवा को बंद न करने की मांग को लेकर एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन सौंपने वालों में करीब तीन दर्जन ग्रामीण शामिल रहे।

ग्रामीण मामराज शर्मा, राजेंद्र ठाकुर, सुरेश कुमार, नितिन ठाकुर, जसवंत सिंह, लक्ष्मी देवी, राजेंद्र सिंह, प्रेम दत्त, मुकेश कुमार, वीरेंद्र, अभिषेक शर्मा, अभय, अंकित, अरुण शर्मा, रोशन, नरेंद्र, परवीन, प्रसाद शर्मा, प्रीतम सिंह, रामदयाल, रमेश शर्मा, ज्ञान दत्त, नरेश, वैभव शर्मा, आयुष शर्मा, विजय कुमार, जय इंद्र और अरविंद रावत ने बताया कि विभिन्न समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि सरकार प्रदेश के कई परिवहन निगम के रूटों को सरकारी बस सेवा से हटाकर निजी क्षेत्र को देने की योजना बना रही है।

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ग्रामीणों के अनुसार संभावित रूटों में पच्छाद विधानसभा क्षेत्र के सराहां बस स्टैंड से चलने वाला सराहां-मेहंदों बाग-नाडब-खोजर सरकारी बस सेवा का रूट भी शामिल बताया जा रहा है। यह बस सेवा पिछले दो दशकों से अधिक समय से संचालित है और इस क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है।

उन्होंने कहा कि इस रूट से कई गांवों के स्कूल, कॉलेज और आईटीआई के छात्र प्रतिदिन यात्रा करते हैं। इसके अलावा ग्रामीण अपनी आजीविका से जुड़े कार्यों, दैनिक जरूरतों का सामान लेने और विभिन्न कार्यालयों में कार्यों के लिए उपमंडल मुख्यालय सराहां तक जाने लिए भी इसी बस सेवा पर निर्भर हैं। इस रूट पर यह एकमात्र सरकारी बस सेवा है।

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ग्रामीणों ने कहा कि यदि इस रूट को निजी क्षेत्र को सौंपा गया, तो पासधारक छात्र और अन्य लोग सरकारी परिवहन सुविधा से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने ज्ञापन में मांग रखी कि इस बंद को न तो बंद किया जाए और न ही समय सारिणी में कोई बदलाव किया जाए। ये बस लोगों की जरूरत है। इसके बिना ग्रामीणों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। लिहाजा, सरकार ग्रामीणों को इस सुविधा से वंचित न रखे।

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