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धौलाकुआं में 50 महिला किसानों को दिया मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण, बी बॉक्स और कॉलोनियां भी बांटी

सह-निदेशक डॉ. प्रियंका ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए परियोजना की रूपरेखा और मधुमक्खी पालन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत अब तक पांच प्रशिक्षण कार्यक्रम (3 बुनियादी व 2 विशिष्ट प्रशिक्षण) आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 125 किसान लाभान्वित हुए हैं।

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नाहन : क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र धौलाकुआं (सिरमौर) की ओर से ग्राम पातलियों में सोमवार को मधुमक्खी पालन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 50 महिला किसानों ने सहभागिता की। यह कार्यक्रम “हिमाचल प्रदेश में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सतत मधुमक्खी पालन के लिए शहद एवं अन्य मधुमक्खी उत्पाद उत्पादन मॉडल” परियोजना के अंतर्गत संपन्न हुआ।

इस परियोजना के तहत दो स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जिनमें “मौन पालक समूह” की अध्यक्ष निशा छनानिया और “उमंग स्वयं सहायता समूह” की अध्यक्ष सीमा ठाकुर हैं। सह-निदेशक डॉ. प्रियंका ठाकुर ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए परियोजना की रूपरेखा और मधुमक्खी पालन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत अब तक पांच प्रशिक्षण कार्यक्रम (3 बुनियादी व 2 विशिष्ट प्रशिक्षण) आयोजित किए जा चुके हैं, जिनसे 125 किसान लाभान्वित हुए हैं।

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उन्होंने बताया कि मधुमक्खियां परागण के माध्यम से फसलों की उपज और गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने मधुमक्खी अनुकूल पुष्प स्रोत के महत्व पर विशेष बल देते हुए बताया कि वर्षभर विभिन्न फूलों की उपलब्धता मधुमक्खी कॉलोनियों की मजबूती और अधिक शहद उत्पादन के लिए अत्यंत आवश्यक है। सरसों, लीची, नींबू वर्गीय फसलें, जंगली पुष्प एवं अन्य मौसमी फूल मधुमक्खियों के लिए उत्तम आहार स्रोत हैं।

डॉ. मीना ठाकुर वरिष्ठ वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) ने मधुमक्खी पालन के महत्व, विभिन्न प्रजातियों, एपियरी स्थल चयन, छत्तों की स्थापना, मौसमी प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, रानी मधुमक्खी के उचित प्रबंधन और शहद व अन्य उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी कॉलोनियों का नियमित निरीक्षण, स्वच्छ एवं शांत स्थान का चयन, सुरक्षात्मक पोशाक का उपयोग और पुष्प संसाधनों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

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फूलों की कमी के समय 1:1 अनुपात में चीनी घोल देने और आवश्यकता पड़ने पर कॉलोनियों को बेहतर पुष्प क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की भी सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान महिला किसानों को मधुमक्खी बक्से (बी बॉक्स), मधुमक्खी कॉलोनियां एवं अन्य आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई, ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन आरंभ कर सकें। कार्यक्रम के अंत में डॉ. शिल्पा (सहायक प्राध्यापक ) ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर राकेश (तकनीकी ग्रेड-1) भी उपस्थित रहे।

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