बिलासपुर : उप-निदेशक पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन, बिलासपुर डॉ. विनोद कुंदी ने जानकारी देते हुए बताया कि पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पशु मित्र नीति-2025 अधिसूचित की गई है। हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स एवं सोशल मीडिया में पशु मित्रों की नियुक्ति हेतु निर्धारित शारीरिक परीक्षण को लेकर व्यक्त की गई आशंकाओं के संदर्भ में पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया कि पशु मित्र की भूमिका में बड़े पशुओं को संभालना, बीमार भेड़-बकरियों (औसतन 25 किलोग्राम) को उठाना तथा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 50 किलोग्राम तक पशु आहार का परिवहन जैसे कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के लिए न्यूनतम शारीरिक क्षमता एवं सहनशक्ति आवश्यक है, ताकि कार्यकर्ता एवं पशुधन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि नीति के अंतर्गत किया जाने वाला शारीरिक परीक्षण केवल एक कार्यात्मक फिटनेस मूल्यांकन है, न कि सहनशक्ति प्रतियोगिता। इसका उद्देश्य केवल सौंपे गये कर्तव्यों को सुरक्षित रूप से निभाने की न्यूनतम क्षमता को सत्यापित करना है। यह परीक्षण सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है तथा इसका उद्देश्य किसी भी अभ्यर्थी को अपमानित करना या किसी वर्ग विशेष के लिए बाधा उत्पन्न करना नहीं है।
उन्होंने बताया कि अब तक 315 अभ्यर्थियों की शारीरिक परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और किसी भी अभ्यर्थी को गंभीर चोट लगने की कोई घटना सामने नहीं आई है। मीडिया में आई घटना, जो जिला मंडी के धर्मपुर उपमंडल में घटी, उसमें आवेदक को कोई गंभीर चोट नहीं आई तथा वह परीक्षा पूर्ण करने में सक्षम रही। विभाग द्वारा सभी परीक्षा स्थलों पर आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वह अपुष्ट सूचनाओं के बजाय अधिसूचित नीति के प्रावधानों पर ही विश्वास करें।
डॉ. कुंदी ने आगे बताया कि मामले की व्यापक समीक्षा के उपरांत हिमाचल प्रदेश सरकार ने पशु मित्र नीति में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार पूर्व शारीरिक परीक्षण को शारीरिक दक्षता परीक्षण से प्रतिस्थापित किया गया है, जिसमें पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 5000 मीटर दौड़ 30 मिनट में तथा महिला अभ्यर्थियों के लिए 1500 मीटर दौड़ 10 मिनट में पूर्ण करना अनिवार्य रखा गया है। यह परीक्षण नीति के परिशिष्ट-डी में निर्धारित मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पूर्व प्रावधानों के तहत पहले ही शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों को संशोधित नीति के अंतर्गत भी पात्र माना जाएगा, जबकि जो अभ्यर्थी पूर्व परीक्षा में सफल नहीं हो पाए थे, उन्हें संशोधित प्रारूप के अनुसार पुनः अवसर प्रदान किया जाएगा।



