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भांग की खेती पर सरकार का बड़ा कदम! पायलट प्रोजेक्ट से खुलेगा वैधता का रास्ता

प्रदेश सरकार भांग की खेती को अधिकृत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है और इसी कड़ी में जल्द पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है।

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शिमला : प्रदेश सरकार भांग की खेती को अधिकृत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है और इसी कड़ी में जल्द पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। हालांकि इस प्रक्रिया से पहले विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस संबंध में सरकार ने विधानसभा में लिखित जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि भांग की खेती को लेकर पहले से गठित समिति अपनी रिपोर्ट सदन में पेश कर चुकी है, जिसे एकमत से स्वीकार कर लिया गया है।

सरकार ने बताया कि राजस्व, उद्यान और जनजातीय विकास मंत्री की अध्यक्षता में बनी समिति ने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन और सुझाव दिए थे। अब इन सिफारिशों को लागू करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसने व्यापक विचार-विमर्श के बाद भांग की खेती के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्णय लिया है।

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इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी को नामित किया गया है। राज्य मंत्रिमंडल की 24 जनवरी 2025 को हुई बैठक में इस विषय के लिए कृषि विभाग को नोडल विभाग घोषित किया जा चुका है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भांग की खेती को विधिसम्मत बनाने के लिए एनडीपीएस नियम 1989 में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई है। फिलहाल प्रस्तावित नियमों का मसौदा गृह, वन, राजस्व, कृषि और उद्यान विभागों के साथ विश्वविद्यालयों को सुझाव और टिप्पणियों के लिए भेजा गया है।

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सरकार के अनुसार भांग की खेती का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील और बहुआयामी है, जिसमें आर्थिक संभावनाओं के साथ कानून व्यवस्था और दुरुपयोग की रोकथाम जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हैं। इसलिए इस दिशा में कदम बेहद सावधानी और नियंत्रण के साथ उठाए जा रहे हैं। अभी इस पूरी प्रक्रिया की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है, लेकिन सरकार जल्द ही इसे जमीन पर उतारने की तैयारी में है।

सरकार का फोकस भांग के औषधीय उपयोग पर रहेगा, जिसमें इसके जरिए दवाइयां और कपड़ा जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकें। इसी के साथ सरकार मानती है कि अगर यह पहल सफल रहती है तो प्रदेश में स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

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