हरिपुरधार : हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चूड़धार में पिछले करीब छह माह से ठप पड़ी पेयजल आपूर्ति को बहाल करने के लिए चूड़ेश्वर सेवा समिति के सेवक कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के बीच दिन-रात जुटे हैं।
चोटी पर कई स्थानों पर पानी की पाइपें तीन से सात फीट मोटी बर्फ की परत के नीचे दबीं हैं, जिन्हें निकालकर दोबारा चालू कर पानी की आपूर्ति करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन कुदरत की कड़ी चुनौतियों के बीच चूड़ेश्वर सेवा समिति के सेवादारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
सेवादारों को बर्फ काटकर पाइपलाइन तक पहुंचना पड़ रहा है। कई जगह पाइप पूरी तरह जम चुकी हैं, ऐसे में पानी का प्रवाह बहाल करने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है। कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों के बावजूद समिति के सदस्य लगातार काम में जुटे हैं, ताकि 15 मई से पहले हर हाल में पेयजल व्यवस्था बहाल की जा सके।
दरअसल, चूड़ेश्वर सेवा समिति 15 मई से चूड़धार में लंगर सेवा शुरू करने जा रही है। इसके लिए पानी की आपूर्ति सुचारू होना बेहद जरूरी है। इन दिनों रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु चूड़धार पहुंच रहे हैं, लेकिन लंगर सेवा शुरू न होने के कारण श्रद्धालुओं को ढाबों में महंगा भोजन करना पड़ रहा है। समिति का कहना है कि लंगर शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को मुफ्त भोजन के साथ ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
भारी बर्फबारी का असर चूड़धार की शौचालय व्यवस्था पर भी पड़ा है। अधिकांश शौचालय बंद पड़े हैं। हालांकि समिति ने महिलाओं के लिए दो शौचालय चालू कर दिए हैं, जबकि बाकी शौचालयों को शुरू करने का काम भी तेजी से चल रहा है।
चूड़ेश्वर सेवा समिति के प्रबंधक बाबू राम शर्मा ने बताया कि 15 मई से समिति द्वारा लंगर सेवा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन दिनों रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु चूड़धार पहुंच रहे हैं और उनके ठहरने की पूरी व्यवस्था समिति द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि भारी बर्फबारी के कारण सभी शौचालय बंद पड़े थे, जिनमें से महिलाओं के लिए दो शौचालय चालू कर दिए गए हैं और बाकी को भी जल्द बहाल किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि समिति का अभी एक ही मकसद है। बर्फ की कैद में दबी पाइपलाइनों को मुक्त करना, ताकि 15 मई से शिरगुल महाराज के दर पर लंगर की खुशबू फिर से महक सके और किसी भी श्रद्धालु को खाली पेट न सोना पड़े।
