चंबा : हिमाचल प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। जिला चंबा में वर्ष 2026 के दौरान प्राकृतिक खेती से उत्पादित 185.92 क्विंटल गेहूं 133 किसानों से खरीदा गया। सरकार ने किसानों को 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिया, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ प्राकृतिक खेती के प्रति उनका रुझान भी तेजी से बढ़ा है।
हिमाचल प्रदेश वर्तमान में देश का एकमात्र राज्य है, जहां प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं की सरकारी खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम के आकर्षक एमएसपी पर की जा रही है। इसका लाभ चंबा जिले के किसानों को भी मिल रहा है और बड़ी संख्या में किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
वर्ष 2026 के आंकड़े इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। पिछले वर्ष 2025 में जिले के केवल 39 किसानों से प्राकृतिक गेहूं की खरीद हुई थी, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 133 हो गई। कृषि विभाग का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में चंबा प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में प्रदेश के अग्रणी जिलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
इस वर्ष प्राकृतिक गेहूं की खरीद जिले के तीन संग्रह केंद्रों के माध्यम से की गई। सिविल सप्लाई संग्रह केंद्र चंबा में 91.08 क्विंटल गेहूं खरीदा गया, जिसमें विकासखंड चंबा के 58 किसानों ने 79.42 क्विंटल, सलूणी के 5 किसानों ने 7.80 क्विंटल तथा मैहला के 21 किसानों ने 3.86 क्विंटल गेहूं बेचा। वहीं सिविल सप्लाई भंडार चुवाड़ी में भटियात विकासखंड के 30 किसानों से 83.28 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। इसके अलावा बनीखेत संग्रह केंद्र में भटियात के 19 किसानों ने 11.56 क्विंटल प्राकृतिक गेहूं सरकार को बेचा।
परियोजना निदेशक (आतमा) नितिन कुमार शर्मा ने बताया कि प्राकृतिक खेती केवल बेहतर मूल्य दिलाने का माध्यम नहीं, बल्कि टिकाऊ कृषि व्यवस्था की मजबूत नींव है। इससे खेती की लागत घटती है, मिट्टी की उर्वरता और जैव विविधता सुरक्षित रहती है तथा रासायनिक प्रदूषण कम होता है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज रासायनिक अवशेषों से मुक्त और अधिक पौष्टिक होने के कारण उपभोक्ताओं को भी बेहतर गुणवत्ता वाला खाद्यान्न उपलब्ध होता है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की आतमा परियोजना के तहत चंबा जिले में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, प्रदर्शन प्लॉट, किसान गोष्ठियों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार सहयोग दिया जा रहा है। इन प्रयासों के कारण जिले में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
प्रदेश सरकार ने केवल प्राकृतिक गेहूं ही नहीं, बल्कि अन्य प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए भी आकर्षक न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। प्राकृतिक मक्की का एमएसपी 50 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी में उत्पादित जौ का 80 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी का 150 रुपये प्रति किलोग्राम तथा प्राकृतिक अदरक का 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
