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सिरमौर में 800 साल पुराने मंदिर के पुनर्निर्माण बाद निभाई गई ये आखिरी रस्म, देवता के दर्शन पाने उमड़ी भारी आस्था

ग्राम पंचायत भराड़ी में आगाई महाराज और केलश्वर महाराज की करीब 800 वर्ष पुरानी देव परंपरा से जुड़े मंदिर का नव निर्माण पूरा होने के बाद रविवार को कुरुड़ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

संगड़ाह : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के संगड़ाह विकास खंड की ग्राम पंचायत भराड़ी में आगाई महाराज और केलश्वर महाराज की करीब 800 वर्ष पुरानी देव परंपरा से जुड़े मंदिर का नव निर्माण पूरा होने के बाद रविवार को कुरुड़ कार्यक्रम आयोजित किया गया। करीब तीन वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार मंदिर में देवताओं को देव परंपरा के अनुसार उनके पुराने स्थान पर पुनः विराजमान किया गया।

धार्मिक परंपरा के तहत दोनों देवताओं को पहले हरिद्वार ले जाया गया और इसके बाद चूड़धार की यात्रा करवाई गई। भराड़ी लौटने पर रात में जागरण हुआ। रविवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद मंदिर की छत पर कुरुड़ (टोपी) लगाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और देव जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।

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मंदिर के पुजारी जयपाल शर्मा ने बताया कि पहले आगाई और केलश्वर महाराज इसी मंदिर में विराजमान होते थे, जबकि शिरगुल महाराज और बिजट महाराज के लिए अलग मंदिर था। बाद में ग्रामीणों ने चारों देवताओं को एक साथ रखा। इसके बाद ग्रामीणों को देव-दोष का सामना करना पड़ा। पुजारी के अनुसार देवता की ओर से पुराने स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाने का आदेश मिला।

इसके बाद ग्रामीणों और मंदिर कमेटी ने सामूहिक सहयोग से उसी स्थान पर मंदिर का नव निर्माण करवाया। करीब तीन वर्ष में निर्माण पूरा हुआ और अब आगाई महाराज व केलश्वर महाराज को फिर उसी स्थान पर विराजमान किया गया है, जहां उनकी पुरानी देव परंपरा चली आ रही थी।

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ग्रामीण चेतराम वर्मा ने कहा कि मंदिर क्षेत्र की करीब 800 वर्ष पुरानी आस्था और देव परंपरा से जुड़ा है। पुराने स्थान पर मंदिर का निर्माण ग्रामीणों की सामूहिक इच्छा थी और सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया।

उपप्रधान भरत भूषण ने कहा कि तीन वर्षों की मेहनत और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण पूरा हुआ है। कुरुड़ कार्यक्रम में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और देव परंपरा का प्रतीक है।

पुजारी विनोद शास्त्री ने बताया कि हरिद्वार और चूड़धार की यात्रा के बाद जागरण किया गया तथा सुबह पूजा-अर्चना के बाद कुरुड़ लगाया गया। उन्होंने इसे धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर बताया।

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कुरुड़ कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर देवताओं का आशीर्वाद लिया। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर का नव निर्माण सदियों पुरानी देव परंपरा को उसके मूल स्थान पर फिर से स्थापित करने का प्रयास है।

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Aapki Baat News Desk
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