शिमला/नाहन : हिमाचल के जिला सिरमौर में चल रही एक शराब कंपनी पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ी कार्रवाई की है। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन को लेकर FSSAI की जांच टीम ने डिस्टिलरी परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान गंभीर खामियां सामने आने के बाद कंपनी का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है। FSSAI ने नारग स्थित मैसर्स पैराडाइज डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड पर ये कार्रवाई की है।
Licence of FBO Paradise Distilleries has been suspended following major and critical non compliances.
FSSAI remains committed to strengthen food safety ecosystem through strongest enforcement actions. #FSSAIAction #FSSAINotice pic.twitter.com/jO3MPyG39A— FSSAI (@fssaiindia) September 18, 2026
निरीक्षण के दौरान परिसर में मिली अत्यधिक अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों और गंभीर खामियों के कारण FSSAI ने इस 16 साल पुरानी शराब निर्माता कंपनी का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन आदेश जारी करने के साथ ही प्राधिकरण ने डिस्टिलरी प्रबंधन को सख्त हिदायत दी है कि वे सस्पेंशन अवधि के दौरान अपनी सभी खाद्य और पेय उत्पादन गतिविधियों को तुरंत रोक दें।
इसके साथ ही कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर निरीक्षण में पाई गई सभी तकनीकी, संरचनात्मक और स्वच्छता संबंधी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है। जब तक ये मानक पूरे नहीं होते, तब तक निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नारग में स्थापित मैसर्स पैराडाइज डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड शराब निर्माण एवं पेय पदार्थ क्षेत्र की एक प्रमुख इकाई है। यह कंपनी मुख्य रूप से उच्च गुणवत्ता वाले लिकर उत्पादों के निर्माण और B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) मार्केट में औद्योगिक अल्कोहल की आपूर्ति के लिए जानी जाती है।
हिमाचल प्रदेश आबकारी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस शराब निर्माता कंपनी का सबसे प्रसिद्ध और आधिकारिक फ्लैगशिप ब्रांड ‘AAA Blues Pure’ है।
व्यावसायिक पेय पदार्थों के अलावा, यह शराब निर्माता कंपनी बड़े पैमाने पर औद्योगिक अल्कोहल का निर्माण और वितरण भी करती है। कंपनी के औद्योगिक अल्कोहल पोर्टफोलियो में मुख्य रूप से विकृत इथेनॉल (Denatured Ethanol), एथिल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) और परिशोधित स्पिरिट (Rectified Spirit) शामिल हैं। इन सभी उत्पादों की आपूर्ति औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में की जाती है।
जानकारी के मुताबिक FSSAI की ओर से डिस्टिलरी परिसर में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़े 5 अत्यंत गंभीर उल्लंघन सामने आए हैं। जांच में मादक पेय पदार्थों (वोदका और व्हिस्की) के निर्माण में एक्सपायर हो चुके फ्लेवर्स और कृत्रिम रंगों का उपयोग पाया गया, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।
उत्पादन वातावरण भी बेहद अस्वच्छ दर्ज किया गया, जहां ब्लेंडेड टैंक खुले थे, बोतलें साफ करने वाले रिंसर पर ग्रीस और धूल जमी थी, तथा बिना किसी ‘ग्लास पॉलिसी’ के कांच के टूटे टुकड़े बिखरे हुए थे। इसके अलावा, कंपनी ने सेंट्रल लाइसेंसिंग अथॉरिटी के नोटिस के बावजूद अपने लिकर प्रॉडक्ट्स के लेबल पर अनिवार्य वैधानिक बदलाव लागू नहीं किए और न ही कोई स्पष्टीकरण दिया।
संयंत्र का बुनियादी ढांचा भी जर्जर स्थिति में था, जहां खराब दरवाजों की फिटिंग, अपर्याप्त रोशनी, दीवारों से उखड़ते पेंट, अस्वास्थ्यकर पैकिंग, पेस्ट कंट्रोल के अभाव और फूड हैंडलर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता में भारी कमी जैसी समस्याएं पाई गईं। साथ ही, कर्मचारियों के मेडिकल और टीकाकरण रिकॉर्ड अनुपलब्ध थे और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, कस्टमर कंप्लेंट हैंडलिंग व फूड सेफ्टी सिस्टम ऑडिट से जुड़े वैधानिक दस्तावेज भी अधूरे पाए गए।
हालांकि, मामले की पुष्टि को लेकर सिरमौर के संबंधित अधिकारियों से बात की गई, लेकिन किसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, FSSAI ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर मामले की जानकारी सार्वजनिक की है।