नाहन : शहर की भीड़ में एक शख्स बेफिक्र अपनी जिंदगी जी रहा था, लेकिन उसके अतीत की एक फाइल चार दशक से पुलिस के इंतजार में खुली पड़ी थी।
साल बदलते गए, ठिकाने बदले और जिंदगी आगे बढ़ती रही, मगर राजस्थान के उदयपुर में दर्ज 32 हजार रुपये की कथित ठगी का मामला उसका पीछा नहीं छोड़ पाया। इस शख्स पर 5 मार्च 1984 को दर्ज इस मामले में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगारों से पैसे लेने का आरोप था।
मामले में शामिल नौ आरोपी गिरफ्तार हो चुके थे, लेकिन ये शातिर पुलिस की पकड़ से बाहर रहा। हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ का रहने वाला विजय कुमार यादव कई राज्यों में रहा और आखिरकार हिमाचल प्रदेश के नाहन में आकर बस गया। वह जवाहर नवोदय विद्यालय में सेवाएं देने के बाद साई कोच के रूप में भी कार्यरत रहा और खेलों की दुनिया से जुड़कर जीवन बिताता रहा।
यहां उसने अपनी अलग पहचान बना ली, लेकिन उसे शायद अंदाजा नहीं था कि चार दशक पुराना मामला एक दिन नाहन के चौगान मैदान तक पुलिस को ले आएगा।
राजस्थान के उदयपुर स्थित धनमंडी थाने से आई पुलिस टीम ने आरोपी तक पहुंचने के लिए सीधे गिरफ्तारी की कोशिश करने के बजाय अलग रणनीति अपनाई। पुलिसकर्मी खिलाड़ी बनकर चौगान मैदान पहुंचे और कोच से मदद मांगी। बातचीत के दौरान उसकी पहचान की पुष्टि की गई। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। विजय कुमार यादव लंबे समय से नाहन में एथलेटिक्स क्लबों से जुड़ा था और कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय था।
युवाओं को दिया था नौकरी दिलाने का झांसा
पुलिस के अनुसार, 5 मार्च 1984 को राजस्थान के धनमंडी पुलिस थाने में भंवर सिंह नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विजय कुमार यादव और उसके साथियों ने ‘किनारा ग्रुप व अग्रवाल सेल्स’ नाम से एक संस्था बनाई थी। आरोपियों ने दावा किया कि संस्था को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली हुई है और इसके माध्यम से बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाई जाएगी।
शिकायत के मुताबिक, नौकरी का भरोसा देकर प्रत्येक व्यक्ति से 3,000 रुपये वसूले गए। करीब 32 हजार रुपये लेने के बाद आरोपी कार्यालय बंद कर फरार हो गए। पुलिस ने इस मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मुख्य आरोपी विजय कुमार यादव पकड़ में नहीं आया। उसके खिलाफ मामला लंबित रहा और वह उद्घोषित अपराधी के रूप में पुलिस की तलाश में था।
भिवानी से शुरू हुई फरारी, कई राज्यों में रहा
विजय कुमार यादव का मूल संबंध हरियाणा के भिवानी जिले के रूपगढ़ से बताया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पहचान से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और पुश्तैनी दस्तावेजों में बदलाव करवाने की कोशिश की। भिवानी में सरकारी और जमीन संबंधी दस्तावेजों से अपना नाम हटवाने की जानकारी भी सामने आई है।
फरारी के दौरान वह असम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित अलग-अलग राज्यों में रहा। इस दौरान वह कोचिंग के काम से भी जुड़ा रहा। बाद में उसने नाहन में घर बसा लिया, मतदाता सूची में नाम दर्ज करवाया और पत्नी, बच्चों तथा पोते-पोतियों के साथ सामान्य पारिवारिक जीवन बिताने लगा। स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एथलेटिक्स कोच के रूप में बन गई।
पारिवारिक संपर्कों से मिले सुराग
उदयपुर के धनमंडी थाने की पुलिस टीम ने तकनीकी और मैनुअल जांच के जरिए आरोपी तक पहुंचने के प्रयास किए। पुलिस के अनुसार, रूपगढ़ में उसके पारिवारिक संपर्कों से जुड़े सुराग भी जांच में मददगार बने। इन जानकारियों के आधार पर राजस्थान पुलिस की टीम नाहन पहुंची और सिरमौर पुलिस के सहयोग से चौगान मैदान में कार्रवाई को अंजाम दिया।
एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने बताया कि राजस्थान पुलिस ने नाहन पुलिस की सहायता से पुराने मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान विजय कुमार यादव के तौर पर हुई है, जो लंबे समय से नाहन में रह रहा था। उन्होंने बताया कि राजस्थान पुलिस मामले में आगामी कार्रवाई कर रही है।

