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BBMB पर हिमाचल की ऐतिहासिक जीत की नींव पूर्व धूमल सरकार ने रखी, मोदी सरकार ने दिलाया निर्णायक समाधान : बिंदल

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे दशकों की कानूनी लड़ाई, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली निर्णायक न्यायिक सफलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत समाधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

नाहन : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के लंबित बिजली बकाये को लेकर सर्वाेच्च न्यायालय के 6 नवंबर 2026 के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है।

डॉ. बिंदल ने इस ऐतिहासिक समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया जाना चाहिए। हिमाचल के हितों के संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य के बीच सकारात्मक सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

शनिवार को नाहन में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. बिंदल ने कहा कि यह निर्णय हिमाचल प्रदेश की जनता के अधिकारों की बड़ी जीत है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे दशकों की कानूनी लड़ाई, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली निर्णायक न्यायिक सफलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत समाधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

कहा, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इस निर्णय का राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय प्रदेश की जनता को इसका पूरा इतिहास बताएं।

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस संघर्ष की जड़ें वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से जुड़ी हैं। हिमाचल प्रदेश ने 1969 में अपनी हिस्सेदारी का दावा केंद्र सरकार के समक्ष रखा था। विभिन्न स्तरों पर प्रयासों के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर वर्ष 1996 में सर्वाेच्च न्यायालय में मूल वाद दायर किया गया। इसके बाद प्रदेश के अधिकारों की लंबी कानूनी लड़ाई चली।

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उन्होंने कहा कि 1998 से 2003 तथा 2007 से 2012 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के अधिकारों से जुड़े इस विषय को महत्वपूर्ण स्थान मिला। विशेष रूप से धूमल सरकार के दूसरे कार्यकाल में 27 सितंबर 2011 को सर्वाेच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के कानूनी अधिकार को मान्यता दी। इस निर्णय ने वर्षों से लंबित विवाद के समाधान की मजबूत आधारशिला रखी।

डॉ. बिंदल ने कहा कि यह तथ्य किसी भी स्थिति में भुलाया नहीं जा सकता कि जब सर्वाेच्च न्यायालय ने हिमाचल के अधिकारों को मान्यता दी, उस समय प्रदेश में प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद भी बिजली के बकाये का अंतिम निपटारा नहीं हो सका। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि जब 2011 में हिमाचल के अधिकारों का निर्धारण हो चुका था, तो उसके बाद वर्षों तक प्रदेश को उसका पूरा बकाया क्यों नहीं मिल पाया?

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों के प्रयासों और केंद्र सरकार के सहयोग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वर्ष 2017 से 2022 के बीच जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल सहित विभिन्न चरणों में यह मामला प्रदेश के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बना रहा। हालांकि, 2011 के निर्णय को लागू करने के लिए बिजली की गणना, दरों और परियोजनाओं की पूंजीगत लागत जैसे जटिल प्रश्नों का समाधान आवश्यक था।

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डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस लंबे विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्र सरकार की ओर से भारत के महान्यायवादी द्वारा प्रस्तुत कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले ने वर्षों से लंबित विवाद को सुलझाने का व्यावहारिक रास्ता उपलब्ध कराया। इसके अंतर्गत नकद भुगतान के स्थान पर बिजली के रूप में बकाये का निपटारा करने की व्यवस्था प्रस्तुत की गई, जिसे सर्वाेच्च न्यायालय ने स्वीकार किया।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा की गई गणना के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कुल बिजली बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित हुआ। इसमें प्रदेश की ₹420.77 करोड़ की पूंजीगत देनदारी को ₹3.85 प्रति यूनिट की दर से समायोजित करने पर लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती हुई। इस प्रकार हिमाचल प्रदेश को लगभग 11,973 मिलियन यूनिट बिजली प्राप्त होगी।

सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशानुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों में अक्टूबर से मार्च के दौरान लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली प्रतिवर्ष उपलब्ध कराएंगे। इस व्यवस्था से हिमाचल प्रदेश को दीर्घकालिक ऊर्जा उपलब्धता में महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति अथवा दल की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की जीत है। इस संघर्ष में प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मिली ऐतिहासिक सफलता तथा वर्तमान केंद्र सरकार के समाधानकारी प्रयासों का योगदान महत्वपूर्ण है।

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किशाऊ बांध के सफल क्रियांवयन के लिए भी केवल और केवल केंद्र की मोदी सरकार का ही योगदान है। केंद्र सरकार ने परियोजना का 90 प्रतिशत खर्च वहन करने की स्वीकृति दी है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर सिरमौर जिले के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने जिले के किसानों को मिलने वाले पानी के अधिकार दिल्ली और राजस्थान को बेच दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सिरमौर की आने वाली पीढ़ियों के अधिकार भी प्रभावित होंगे। मुख्यमंत्री इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं, जबकि प्रदेश और सिरमौर की जनता को इस फैसले की वास्तविक स्थिति बताई जानी चाहिए।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बीबीएमबी का फैसला किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की जीत है। इसमें धूमल सरकार के कार्यकाल में मिली न्यायिक सफलता और केंद्र की मोदी सरकार के समाधानकारी प्रयासों की अहम भूमिका रही है।

Aapki Baat News Desk
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