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नाहन कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को मिला सर्वांगीण विकास का विजन, जीवन की नई दिशा

प्राचार्य ने मोबाइल फोन को विद्यार्थियों का "सबसे निकट का शत्रु" बताते हुए कहा कि आधुनिक उपकरणों का असंतुलित प्रयोग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में बाधक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य, उद्देश्य और जीवन मूल्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। 

नाहन : डॉ. वाई.एस. परमार पी.जी. कॉलेज नाहन में बुधवार को बी.ए. प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए इंडक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें 360 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई।

आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की समन्वयक प्रो. रीना चौहान ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए  विद्यार्थियों को कॉलेज की कार्यप्रणाली के साथ साथ परीक्षा प्रणाली, मेंटोर-मेंटी व्यवस्था और संपूर्ण कला संकाय से परिचित कराया।

उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि कॉलेज की वेबसाइट पर पाठ्यक्रम, ई-सामग्री, महत्वपूर्ण सूचना, ई-संसाधन और अन्य आवश्यक लिंक्स उपलब्ध रहते हैं। बस पास फॉर्म में मेंटर के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे और तीन दिन तक का अवकाश भी मेंटर द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।

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उन्होंने कैंटीन, ग्रंथालय में पठन की सुविधा, इंडोर जिम्नेजियम, खुले रंगमंच, शैक्षिक भ्रमण, प्राथमिक चिकित्सा सुविधा, विभिन्न इकाइयों एवं क्लबों जैसे एन.एस.एस., एन.सी.सी., इको क्लब, रेड रिबन क्लब, साहित्यिक समिति, खेलकूद, आंतरिक समिति, ई-न्यूजलेटर, छात्रवृत्ति योजनाओं और छात्राओं के लिए विश्राम कक्ष की भी जानकारी दी।

साथ ही ICDEOL और IGNOU अध्ययन केंद्रों के माध्यम से पत्राचार पाठ्यक्रमों और करिअर मार्गदर्शन एवं प्लेसमेंट सेल की भूमिका पर प्रकाश डाला, जो रोजगार मेले, करियर शिविर एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करती है। उप-प्राचार्य डॉ. देवराज ने शैक्षणिक जीवन की सफलता के लिए प्रेरित कर विद्यार्थियों से आत्मानुशासन, सक्रिय सहभागिता और सतत् प्रयास की अपेक्षा व्यक्त की।

प्राचार्य डॉ. विभव कुमार शुक्ला ने भारतीय शिक्षा पद्धति की गुरु-शिष्य परंपरा को विश्व की सबसे प्राचीन और प्रभावशाली व्यवस्था बताते हुए कहा कि प्रारंभिक काल में शिक्षा पुस्तक-रहित होती थी, जबकि आज तकनीक पर अत्याधिक निर्भरता के कारण स्मरण शक्ति और एकाग्रता में कमी आई है।

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उन्होंने मोबाइल फोन को विद्यार्थियों का “सबसे निकट का शत्रु” बताते हुए कहा कि आधुनिक उपकरणों का असंतुलित प्रयोग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में बाधक है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य, उद्देश्य और जीवन मूल्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने छात्रों से महाविद्यालय परिसर, शौचालय एवं अन्य संसाधनों का सदुपयोग, समाज के प्रति उत्तरदायित्व औऱ सभी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता की अपील की। कार्यक्रम का समापन आईक्यूएसी के सह-समन्वयक प्रो. कमल डोगरा के औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।

इस अवसर पर डॉ. उत्तमा पांडेय, डॉ. विवेक नेगी, डॉ. सरिता, डॉ. पंकज, डॉ. जगदीश चंद, प्रो. सुदेश, डॉ. रविकांत, डॉ. अनूप, डॉ. जगपाल, डॉ. जयचंद, प्रो. बारू राम, प्रो. नवदीप शाह, डॉ. वीना, डॉ. प्रियंका, प्रो. गोपाल भारद्वाज, डॉ. विनीत, प्रो. पंकज चांडक, प्रो. दिव्या, प्रो. रजत, प्रो. विनोद, प्रो. ट्विंकल, प्रो. दीपिका, डॉ. हिमेंदर और सुरेश शर्मा (ग्रेड-1), अधीक्षक कार्यालय सहित अनेक गणमान्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

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Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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