बड़ी खबर : श्री रेणुकाजी बांध परियोजना को मिली फाइनल फॉरेस्ट क्लीयरेंस, 16 जनवरी को खुलेंगे डायवर्जन टनल के टेंडर

जिला सिरमौर में राष्ट्रीय महत्व की श्री रेणुकाजी बांध परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम फॉरेस्ट क्लीयरेंस की मंजूरी मिल गई है। दशकों से लंबित इस राष्ट्रीय महत्व की बहुआयामी परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही अब इसके निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

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श्री रेणुकाजी : जिला सिरमौर में राष्ट्रीय महत्व की श्री रेणुकाजी बांध परियोजना को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम फॉरेस्ट क्लीयरेंस की मंजूरी मिल गई है। दशकों से लंबित इस राष्ट्रीय महत्व की बहुआयामी परियोजना को मंजूरी मिलने के साथ ही अब इसके निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

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परियोजना के प्रथम चरण में बनाई जाने वाली डायवर्जन टनलों के लिए 16 जनवरी को टेंडर शिमला में खोले जाएंगे। 6946 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला श्री रेणुकाजी बांध छह वर्षों में तैयार किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के पूरा होने पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को प्रतिदिन 23 लाख क्यूसिक पानी प्रति मिनट उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि हिमाचल प्रदेश को 40 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी।

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इसके अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड को सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा। श्री रेणुकाजी में बनने वाले इस रॉक फिल बांध की ऊंचाई 148 मीटर होगी। बांध निर्माण से 24 किलोमीटर लंबी झील अस्तित्व में आएगी, जिसे परशुराम सागर नाम दिया जाएगा। इस झील के निर्माण से 1988 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी।

परियोजना की लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत राशि छह लाभान्वित राज्यों द्वारा वहन की जाएगी। बांध निर्माण से 37 गांवों के 259 परिवार पूर्ण रूप से विस्थापित होंगे, जबकि कुल 1142 परिवार प्रभावित होंगे। प्रभावित परिवारों को सरकार द्वारा अब तक 621 करोड़ रुपए से भी अधिक का मुआवजा प्रदान किया जा चुका है।

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करीब पांच दशकों तक यह परियोजना बजट, भूमि अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लीयरेंस, न्यायालयीन अड़चनों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में अटकी रही। श्री रेणुकाजी बांध परियोजना के महाप्रबंधक खेम सिंह ठाकुर ने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से परियोजना को फॉरेस्ट क्लीयरेंस की अंतिम मंजूरी मिल चुकी है। प्रथम चरण में बनाई जाने वाली डायवर्जन टनलों के लिए 16 जनवरी को टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद बांध निर्माण कार्य तेज गति से शुरू होगा।

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