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पेड़ों पर पंजे, रगड़ और गंध… आखिर क्यों छोड़ता है टाइगर ये ‘निशानी’? सिरमौर के जंगल से सामने आई दिलचस्प जानकारी

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में वन मंडल पांवटा साहिब के आरक्षित जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।

पांवटा साहिब : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में वन मंडल पांवटा साहिब के आरक्षित जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।

गत दिनों ट्रैप कैमरे में टाइगर की तस्वीर और गतिविधियां कैद हुई हैं। लिहाजा, वन और वन्य प्राणी विभाग काफी उत्साहित भी है। टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि के बाद हिमाचल और उत्तराखंड के वन अधिकारी संयुक्त रूप से इसकी निगरानी कर रहे हैं। वहीं, वन विभाग ने आसपास के गांवों के लोगों, गद्दी समुदाय के चरवाहों और किसानों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है।

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में वन मंडल पांवटा साहिब के आरक्षित जंगल में रॉयल बंगाल टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है।
जिला सिरमौर में वन मंडल पांवटा साहिब के जंगल में ट्रैप कैमरा में कैद हुआ टाइगर।

वन अधिकारियों के अनुसार, ट्रैप कैमरा के आसपास पेड़ों पर पंजों के निशान और खरोंचें भी मिली हैं, जिससे संकेत मिलता है कि टाइगर पिछले दो से तीन दिनों से इस इलाके में सक्रिय रहा है।

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वन मंडल पांवटा साहिब के एसीएफ आदित्य शर्मा ने बताया कि टाइगर जहां भी अपनी चहलकदमी करता है, वहां वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए पेड़ों पर पंजों के निशान, शरीर की रगड़ और अपनी गंध (स्मैल) छोड़ता है। ऐसा वह दूसरे नर बाघों को यह संकेत देने के लिए करता है कि यह उसका इलाका यानी टेरेटरी है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 2023 में एक टाइगर शेरजंग नेशनल पार्क में ट्रैप कैमरा में कैद हुआ था। हालांकि, इस क्षेत्र में बाघों की वास्तविक संख्या कितनी है, इस पर वन विभाग और वाइल्ड लाइफ विंग काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां दो टाइगर हो सकते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

वन विभाग ने टाइगर के लिंग की अभी पुष्टि नहीं की है। इसकी जानकारी राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन के साथ भी साझा कर दी गई है और उनकी टीम जल्द ही मौके का दौरा कर सकती है। अधिकारियों का मानना है कि टाइगर का एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुंचना पूरी तरह संभव है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी कई बार इस इलाके में बाघ को देखा था, लेकिन उसके डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। अधिकारियों के अनुसार, यमुना नदी में जलस्तर कम होने पर टाइगर, हाथी और अन्य वन्यजीव अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही करते रहते हैं।

हाल ही में हाथियों का एक झुंड भी वन मंडल पांवटा साहिब के आरक्षित जंगल में पहुंचा है, जिससे किसानों के बगीचों और फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में वन विभाग ने लोगों को जंगलों और एकांत क्षेत्रों में अकेले जाने से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है।

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उधर, वन मंडल पांवटा साहिब के डीएफओ वेद प्रकाश ने टाइगर की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त ट्रैप कैमरा भी लगाए गए हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी टाइगर की मौजूदगी या गतिविधि से जुड़ी कोई जानकारी मिले तो उसकी तुरंत सूचना वन विभाग को दें।

Aapki Baat News Desk
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