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भू-तापीय ऊर्जा के दोहन से हरित हिमाचल के लक्ष्य को मिलेगा बल : CM सुखविंद्र सुक्खू

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य जल, सौर और भू-तापीय ऊर्जा के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शिमला : मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से की जाएगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के ध्येय के साथ कार्य कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अब राज्य सरकार भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य जल, सौर और भू-तापीय ऊर्जा के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भू-तापीय ऊर्जा एक सतत, सुरक्षित और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत सिद्ध हो सकती है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू जिला के मणिकर्ण और कसोल व मंडी जिला के तत्तापानी जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। इन क्षेत्रों में सतही तापमान 57 से 97 डिग्री सेल्सियस तक पाया जाता है तथा यहां भू-तापीय ग्रेडिएंट भी अधिक है, जिससे ये क्षेत्र न केवल विद्युत उत्पादन बल्कि गर्म जल स्रोतों पर आधारित पर्यटन विकास के लिए भी अत्यंत उपयुक्त हैं। उन्होंने कहा कि इस प्राकृतिक संसाधन का दोहन ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दृष्टिकोण के अंतर्गत राज्य सरकार की नवाचार-आधारित शासन व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे भू-तापीय विद्युत संयंत्र कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 24*7 विश्वसनीय बिजली उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह ऊर्जा शिमला, मनाली और केलांग जैसे शीत जलवायु वाले नगरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी, जहां सर्दियों में हीटिंग और गर्मियों में कूलिंग की निरंतर आवश्यकता रहती है। पर्वतीय क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा एक स्थिर बेस-लोड आपूर्ति प्रदान करती है, जो मौसम पर निर्भर नहीं होती।

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उन्होंने कहा कि भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग से लकड़ी और जीवाश्म ईंधनों की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे वनों की कटाई पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इसके साथ ही तत्तापानी और मणिकरण जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय स्पा, रिजॉर्ट और वेलनेस केंद्रों के विकास से पर्यटन तथा ईको-टूरिज्म को नया प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से ड्रिलिंग और संयंत्र संचालन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

इसका उपयोग आवासीय और व्यावसायिक भवनों में सर्दियों में हीटिंग तथा गर्मियों में कूलिंग के लिए किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग खाद्य पदार्थों के सुखाने और प्रसंस्करण के लिए भी किया जा सकता है, जिससे बिजली की लागत में कमी आएगी और उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी उल्लेखनीय रूप से घटेंगे। उन्होंने कहा कि किसान ठंडे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग कर सब्जियों और फूलों की खेती कर सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि यद्यपि भारत में भू-तापीय ऊर्जा का अब तक सीमित उपयोग हुआ है, लेकिन हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय और टेक्टोनिक बेल्ट वाले राज्य के लिए यह सौर और पवन ऊर्जा के अतिरिक्त एक भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत बन सकती है। उन्होंने कहा कि आज विश्व के लगभग 80 देश भू-तापीय ऊर्जा का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं और अमेरिका इस क्षेत्र में सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि आइसलैंड, इंडोनेशिया और चीन जैसे देशों ने इसका सफलतापूर्वक दोहन किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए भू-तापीय ऊर्जा ऊर्जा-सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास की दिशा में एक दूरदर्शी और प्रभावी विकल्प सिद्ध होगी।

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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