शिमला : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में जिलाधीशों (DC) को भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार 5 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने को लेकर दी गई शक्तियों पर रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद उन सभी आरक्षण रोस्टरों पर भी रोक लग गई है, जिन्हें इन शक्तियों के तहत जारी किया गया था।
यह आदेश न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया जिलाधीशों की इन शक्तियों को संविधान के विपरीत ठहराते हुए गैरकानूनी बताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी जिलाधीश ने इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए आरक्षण रोस्टर जारी किया है, तो वह भी प्रभावी नहीं रहेगा। सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि पंचायती राज संस्थाओं के अधिकांश रोस्टर पहले ही जारी किए जा चुके हैं और यह शक्तियां नियम बनाने के अधिकार के तहत जिलाधीशों को दी गई थीं। वहीं याचिकाकर्ताओं ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि संविधान में भौगोलिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, जिस पर कोर्ट ने सहमति जताई।
अदालत ने 30 मार्च को सरकार द्वारा दी गई इन शक्तियों पर रोक लगाते हुए निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में भौगोलिक आधार पर रोस्टर जारी हुआ है, वहां नया रोस्टर तैयार किया जाए। कोर्ट ने इसके लिए 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक की समयसीमा तय की है।
उधर, इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश में सोमवार को जारी किए गए आरक्षण रोस्टर को वापस लेना पड़ा। कई जिलों में जिला परिषद, पंचायत समिति और कुछ जगहों पर पंचायत प्रधानों के रोस्टर भी जारी हो चुके थे, लेकिन हाईकोर्ट के नए आदेश के बाद सभी जिलाधीशों ने इन्हें निरस्त कर दिया।
अब मंगलवार को सभी जिलों में आरक्षण रोस्टर नए सिरे से जारी किया जाएगा। यह रोस्टर वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर तैयार होगा।
