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इलाज कराने नाहन मेडिकल कॉलेज जा रहे तो पहले पढ़ लें ये खबर, रेडियोलॉजी विभाग में नहीं एक भी डॉक्टर

अगर आप इलाज के लिए डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन जाने की सोच रहे हैं और डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की सलाह दी है, तो पहले यह खबर जान लीजिए।

नाहन : अगर आप इलाज के लिए डॉ. वाईएस परमार राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन जाने की सोच रहे हैं और डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन की सलाह दी है, तो पहले यह खबर जान लीजिए।

दरअसल, नाहन मेडिकल कॉलेज का रेडियोलॉजी विभाग अब बिना डाक्टर के है। यहां एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इस 31 जुलाई को विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. दिनेश शर्मा के सेवानिवृत्त होने के साथ ही विभाग पूरी तरह विशेषज्ञ विहीन हो गया और शनिवार से रेडियोलॉजी सेवाएं ठप पड़ गईं हैं।

बता दें कि मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के आठ स्वीकृत पद हैं, लेकिन यहां अब एक भी पद पर डॉक्टर तैनात नहीं है। कुछ महीने पहले दो रेडियोलॉजिस्ट नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि एक अन्य विशेषज्ञ का तबादला हमीरपुर मेडिकल कॉलेज हो गया। अब विभाग में न प्रोफेसर बचा है, न असिस्टेंट प्रोफेसर, न एसोसिएट प्रोफेसर, न सीनियर रेजिडेंट और न ही जूनियर रेजिडेंट।

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जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में पांच सीनियर रेजिडेंट, एक असिस्टेंट प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर और एक प्रोफेसर सह विभागाध्यक्ष का पद स्वीकृत है। वहीं पिछले करीब 10 वर्षों में यहां जूनियर रेजिडेंट के पद भी स्वीकृत नहीं हो सके, जिससे नए विशेषज्ञ तैयार करने की व्यवस्था भी प्रभावित रही।

रेडियोलॉजी विभाग बंद होने का सबसे बड़ा असर मरीजों पर पड़ेगा। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांचों के लिए अब मरीजों को निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ेगा, जहां उन्हें हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और मुश्किलें बढ़ा सकती है।

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उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में मेडिकल कॉलेज को स्वीकृति दी थी और वर्ष 2016 में इसकी शुरुआत हुई, लेकिन एक दशक बाद भी मेडिकल कॉलेज में कई विभाग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं।

डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य आवश्यक स्टाफ की कमी लगातार बनी हुई है। जिला सिरमौर के लोगों को आज भी कई विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि आज तक यहां कार्डियोलॉजी विभाग भी शुरू नहीं हो पाया है और पूरे जिले में किसी भी अस्पताल में दिल के मरीजों का उपचार करने वाला डाक्टर नहीं है। लिहाजा, मरीजों को बाहरी अस्पतालों में अपना उपचार करवाना पड़ रहा है।

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उधर, मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ. संगीत ढिल्लों ने बताया कि रेडियोलॉजी विभाग में आठ स्वीकृत चिकित्सक पद हैं और वर्तमान में सभी पद रिक्त हैं। इस संबंध में सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भेज दी गई है तथा जल्द नियुक्तियां करने का आग्रह किया गया है।

Aapki Baat News Desk
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