हरिपुरधार : हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध आस्था स्थल चूड़धार में शिरगुल महाराज मंदिर के कपाट करीब साढ़े चार महीने बाद मंगलवार को संक्रांति के पावन मौके पर विधि-विधान के साथ खोल दिए गए हैं। कपाट खुलते ही मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना शुरू हो गई है, लेकिन प्रशासन ने अभी आम श्रद्धालुओं की आवाजाही को पूरी तरह हरी झंडी नहीं दी है। इसके बावजूद आस्था का जोश ऐसा रहा कि लोग जोखिम उठाकर भी दर्शन के लिए पहुंच गए।
कठिन हालातों को चुनौती देते हुए 100 से अधिक श्रद्धालु बर्फ से ढके दुर्गम रास्तों को पार कर चूड़धार पहुंचे और भगवान शिरगुल महाराज के दर्शन किए। 11,965 फीट ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में अभी भी भारी बर्फ जमी हुई है, जिससे यात्रा करना अभी काफी जोखिम भरा है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को व्यवस्थाओं की कमी से जूझना पड़ा। चूड़ेश्वर सेवा समिति की सराय बंद है और लंगर सेवा भी शुरू नहीं हो पाई है, जिससे ठहरने और खाने की समुचित व्यवस्था श्रद्धालुओं को नहीं मिल सकी। ऐसे में कई श्रद्धालुओं को बेहद सीमित संसाधनों के सहारे रात गुजारनी पड़ी।
चूड़धार में पेयजल संकट भी गंभीर बना हुआ है। बर्फबारी के कारण प्राकृतिक जल स्रोत जमे हुए हैं, जिससे श्रद्धालु बर्फ पिघलाकर पानी पीने और भोजन बनाने को मजबूर हैं। नौहराधार-चूड़धार मार्ग पर तीन से चार फीट तक बर्फ जमी है। फिसलन के साथ रास्ता भटकने का खतरा लगातार बना हुआ है। हर साल इस मार्ग पर कई श्रद्धालु रास्ता भटक जाते हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने में प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
उधर, चूड़ेश्वर सेवा समिति के प्रबंधक बाबूराम शर्मा ने बताया कि अभी चूड़धार चोटी पर तीन से चार फीट बर्फ जमी है। इसके साथ साथ बर्फबारी से रास्ते भी बंद है। लिहाजा, श्रद्धालु अभी चूड़धार यात्रा का जोखिम न उठाएं। मौजूदा मौसम और मार्ग की स्थिति को देखते हुए फिलहाल यात्रा से परहेज करें और हालात सामान्य होने के बाद ही चूड़धार का रुख करें।
