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पीरन पंचायत में 50 साल बाद भी SC पुरूष को नहीं मिला प्रधान बनने का मौका, रोस्टर पर भेदभाव के आरोप

लोगों ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा 6 अप्रैल को जारी जिला परिषद के रोस्टर में चमियाणा वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन रातोंरात इसे बदलकर 7 अप्रैल की अधिसूचना में अनारक्षित कर दिया गया।

शिमला : जिला प्रशासन द्वारा जारी त्रिस्तरीय पंचायतीराज रोस्टर पर कई जगह सवाल खड़े हो रहे हैं। जुन्गा क्षेत्र के राकेश कुमार, आरएन शर्मा, जय प्रकाश ठाकुर और देशराज शर्मा सहित कई लोगों ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा 6 अप्रैल को जारी जिला परिषद के रोस्टर में चमियाणा वार्ड को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन रातोंरात इसे बदलकर 7 अप्रैल की अधिसूचना में अनारक्षित कर दिया गया। इसे देखकर प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन ने न जाने कितने वार्डों के रोस्टर में बदलाव करके लोगों की भावनाओं के साथ कुठाराघात किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोस्टर पूर्णतया राजनीतिक दबाव के चलते बनाया गया है।

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दूसरी ओर मशोबरा ब्लॉक की पीरन पंचायत में अनुसूचित जाति के पुरूष वर्ग को पांच दशकों बाद भी प्रधान बनने का मौका नहीं मिल पाएगा। ग्राम पंचायत पीरन के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीते पांच दशक से पीरन पंचायत में अनुसूचित जाति के पुरूष वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने रोस्टर पर भेदभाव बरतने के आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि नए रोस्टर के अनुसार पीरन पंचायत में सात में से चार पदों पर महिलाओं का कब्जा होगा। इस पंयायत में प्रधान पद अनुसूचित जाति महिला वर्ग के लिए तीसरी बार आरक्षित कर दिया गया है, लेकिन इस वर्ग के पुरूषों को 50 वर्षों में एक बार भी चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल पाया है।

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