नाहन : हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के लिए जारी नामांकन के बीच सिरमौर जिला में निर्विरोध और सहमति से पंचायतों के चुने जाने का सिलसिला लगातार जारी है। जिला की शरली पंचायत भी अब निर्विरोध चुन ली गई है। खास बात यह रही कि पंचायत के साथ-साथ पंचायत समिति सदस्य का चुनाव भी सहमति से संपन्न हुआ।
शरली पंचायत जिला सिरमौर की चौथी ऐसी पंचायत बन गई है, जहां बिना चुनावी मुकाबले के प्रतिनिधियों का चयन किया गया है। इससे पहले शिलाई विधानसभा क्षेत्र की टटियाना पंचायत और पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की दाड़ो देवरिया व शीना पंचायतें भी निर्विरोध चुनी जा चुकी हैं।
शरली पंचायत में शिरगुल महाराज के पावन प्रांगण में पूरी पंचायत का पैनल सर्वसम्मति से चुना गया। पंचायत प्रधान पद के लिए विद्या देवी पत्नी ग्यारु राम, उपप्रधान पद के लिए विनोद कुमार पुत्र संत राम का चयन किया गया।
वहीं वार्ड सदस्य के रूप में कौशल्या देवी कमलाईक, नागचंद सबाईक, विजय कुमार लोहार, तारा देवी चुआईक और कमला देवी मिजाईक को चुना गया। पंचायत समिति सदस्य के रूप में पिंकी देवी पत्नी सुशील कुमार को भी सर्वसम्मति से चुना गया।
समाजसेवी कुंदन शास्त्री ने बताया कि शरली पंचायत में निर्विरोध चुनाव कराने का मुख्य उद्देश्य गांव में आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द बनाए रखना है, ताकि किसी प्रकार के विवाद की स्थिति पैदा न हो। उन्होंने कहा कि पंचायतवासियों का संकल्प है कि शरली को एक आदर्श गांव बनाया जाए और विकास कार्यों को मिल जुलकर आगे बढ़ाया जाए।
निर्विरोध निर्वाचन के बाद गांव में जश्न जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाई दी और इसे पंचायत की एकजुटता का प्रतीक बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पंचायत में सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत होती है तो विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ते हैं। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि गांव के विकास, मूलभूत सुविधाओं और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की दिशा में मिलकर कार्य करेंगे।
पंचायत वासियों ने यह भी कहा कि शिरगुल महाराज की कृपा और गांव के बुजुर्गों की सलाह से यह ऐतिहासिक फैसला संभव हो पाया। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि यह पहल अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगी, जहां चुनावी प्रतिस्पर्धा से ज्यादा सर्वसम्मति और विकास को प्राथमिकता दी जा सके।
