सिरमौर : क्षेत्रीय विकास, हिमालयी अर्थव्यवस्था और विकास अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान के रूप में डॉ. आत्मा राम की पुस्तक “Changing Growth and Patterns of Development in Uttarakhand” प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक उत्तराखंड राज्य के विकास प्रतिरूपों और क्षेत्रीय असमानताओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में वर्ष 2000-01, 2010-11 और 2020-21 के तीन अलग-अलग कालखंडों को आधार बनाकर उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में कृषि, उद्योग, आर्थिक अवसंरचना और सामाजिक क्षेत्र के विकास का विस्तृत अध्ययन किया गया है। 65 संकेतकों पर आधारित Principal Component Analysis (PCA) तकनीक के माध्यम से विकास की प्रवृत्तियों और क्षेत्रीय विषमताओं का सूक्ष्म मूल्यांकन किया गया है।
पुस्तक की विशेषता यह है कि इसमें पिछड़े जिलों और कमजोर क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान करते हुए नीति-निर्माताओं के लिए लक्षित विकास रणनीतियों का सुझाव दिया गया है। साथ ही भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों की उपलब्धता और सामाजिक-आर्थिक स्तर को ध्यान में रखते हुए संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
लेखक ने विकेन्द्रीकृत और बहु-स्तरीय नियोजन व्यवस्था, सहभागी शासन, संसाधनों के कुशल उपयोग और क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास नीतियों की जरूरत को भी प्रमुखता से रेखांकित किया है। कृषि और औद्योगिक विकास के संदर्भ में स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया है।
यह पुस्तक विकास योजनाकारों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी तथा हिमालयी क्षेत्रों के सतत और संतुलित विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डॉ. आत्माराम अर्थशास्त्र के क्षेत्र में प्रतिष्ठित शिक्षाविद और शोधकर्ता हैं। वे मूल रूप से जिला सिरमौर के रोनहाट क्षेत्र से संबंधित हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी उपाधि प्राप्त की है तथा यूजीसी-जेआरएफ, एसआरएफ और यूजीसी-नेट तीन बार एवं सेट तीन बार उत्तीर्ण किया है। उनके शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। विकास अध्ययन, क्षेत्रीय विकास, हिमालयी विकास और अवसंरचना विकास उनके प्रमुख शोध क्षेत्र हैं।
वर्तमान में डॉ. आत्मा राम National Institute of Technology Hamirpur के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वे शिक्षण, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के माध्यम से अकादमिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।