राजगढ़/शिलाई : हाल ही संपन्न हुए पंचायती राज चुनाव-2026 में जिला सिरमौर के दो युवाओं ने
ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे हिमाचल का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
शिलाई क्षेत्र के 21 वर्षीय वंश तोमर और राजगढ़ के 22 वर्षीय सुदर्श कुमार पंचायत समिति (BDC) सदस्य का चुनाव जीतकर प्रदेश के सबसे युवा निर्वाचित प्रतिनिधियों में शामिल हो गए हैं। कम उम्र में मिली इस बड़ी जिम्मेदारी ने दोनों युवाओं को चर्चा का केंद्र बना दिया है। उनकी जीत को ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं पर बढ़ते जनविश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस बार मतदाताओं ने केवल अनुभव नहीं, बल्कि युवाओं के जोश, सादगी और नई सोच पर भी भरोसा जताया। यही वजह रही कि जिले के दो अलग-अलग विकास खंडों में महज 21 और 22 वर्ष की आयु के दो युवाओं ने बीडीसी सदस्य चुनाव जीतकर नया इतिहास रच दिया।
शिलाई क्षेत्र के विकास खंड तिलोरधार के पंचायत समिति वार्ड नंबर-8 (शमाह पमता) से 21 साल 3 माह के वंश तोमर सबसे कम उम्र के निर्वाचित बीडीसी सदस्यों में शामिल हो गए हैं। शनिवार को शपथ ग्रहण के साथ उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी संभाली। खास बात यह रही कि वंश की शुरुआत में चुनाव लड़ने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन क्षेत्र के लोगों ने उनकी सादगी, मिलनसार स्वभाव और सक्रियता को देखते हुए उन्हें मैदान में उतरने के लिए प्रेरित किया।
शावगा पंचायत के शावडी निवासी युवा व्यवसायी परवेश कुमार के अनुसार, वंश एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखते हैं और उनके पिता संत राम शावगा पंचायत में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। ग्रामीणों के भरोसे और समर्थन ने ऐसा माहौल बनाया कि वंश तोमर ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 226 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
वहीं, सिरमौर की राजगढ़ पंचायत समिति के वार्ड नंबर-1 (कोटी पधोग) से 22 वर्षीय सुदर्श कुमार ने जीत दर्ज कर विशेष पहचान बनाई है।
सुदर्श कुमार अब टाली भूज्जल, माटल बखोग और कोटी पधोग ग्राम पंचायतों का प्रतिनिधित्व करेंगे। ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने और पंचायत स्तर पर नई सोच के साथ काम करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। शनिवार को उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली।
इन दोनों युवाओं की सफलता ने कई पुराने राजनीतिक चेहरों की यादें भी ताजा कर दी हैं। राजगढ़ नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश आर्य ने बताया कि करीब तीन दशक पहले उन्हें भी 21 वर्ष की आयु में सबसे कम उम्र के पार्षद और नगर पंचायत अध्यक्ष बनने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब अधिकांश युवा शिक्षा और रोजगार के लिए शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, ऐसे समय में ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आना और जनता का विश्वास जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
सिरमौर के इन दो युवा चेहरों की जीत केवल चुनावी सफलता नहीं, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि गांवों की राजनीति में अब नई पीढ़ी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने लगी है। जनता ने भी यह संदेश दिया है कि उम्र नहीं, बल्कि सोच, लगन और भरोसा नेतृत्व की असली पहचान बन सकते हैं।
