नाहन : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने दावा किया है कि उसकी मांग पर केंद्र सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप करते हुए एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना को निरस्त करने के संबंध में शपथ पत्र दाखिल किया है। महासंघ का कहना है कि इससे देशभर के लाखों सेवारत शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़ी आशंकाओं को राहत मिली है।
महासंघ की जिला सिरमौर इकाई के अध्यक्ष कपिल मोहन ठाकुर, जिला मंत्री दीपक त्रिपाठी, जिला संगठन मंत्री श्यामलाल भटनागर, जिला कोषाध्यक्ष रोहित कुमार, प्रांत उपाध्यक्ष विजय कंवर, प्रांत सचिव मामराज चौधरी, प्रांत सचिव यशपाल शर्मा, संगड़ाह खंड अध्यक्ष बलदेव सिंह, पच्छाद खंड अध्यक्ष रतन लाल शर्मा, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधेश्याम, शिवानी शर्मा, वीरेंद्र शर्मा, विजय सिंह और सोमदत्त सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की केंद्रीय टीम का आभार व्यक्त किया।
महासंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि एनसीटीई ने 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना में देशभर के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किया था। उनका कहना है कि उच्चतम न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश के बाद इस मुद्दे को लेकर लाखों शिक्षकों की सेवा, सुरक्षा और आजीविका को लेकर चिंता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
उन्होंने कहा कि महासंघ ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता और पदोन्नति के अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर 14 सितंबर 2025 और 18 जून 2026 को जिलों के उपायुक्तों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजे थे और उच्चतम न्यायालय में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था।
महासंघ का दावा है कि केंद्र सरकार ने इस आग्रह को स्वीकार करते हुए एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना को निरस्त कराने की प्रक्रिया अपनाई और इस संबंध में उच्चतम न्यायालय में शपथ पत्र भी प्रस्तुत कर दिया है। महासंघ ने इसे देशभर के शिक्षक समाज के लिए राहत भरा कदम बताते हुए सभी शिक्षकों को बधाई दी है।