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Success Story: एक बीघा में स्ट्रॉबेरी की खेती, हर महीने 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त कमाई… बालकृष्ण बने मिसाल

करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी के बालकृष्ण इसका प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है।

मंडी : आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, तकनीकी मार्गदर्शन तथा बागवानी को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं का रुझान स्वरोजगार की ओर बढ़ा है। सरकारी या निजी नौकरी के पीछे भागने के बजाय आधुनिक खेती और बागवानी अपनाकर युवा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। करसोग उपमंडल की ग्राम पंचायत सोमाकोठी के बालकृष्ण इसका प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती से अपनी अलग पहचान बनाई है।

बालकृष्ण पहले एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी नौकरी चली गई। कठिन दौर में उन्होंने निराश होने के बजाय अपने गांव लौटकर बागवानी को स्वरोजगार के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। नई राह की तलाश में उन्होंने स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली नगदी फसल की खेती शुरू की। शुरुआत में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन बेहतर परिणाम मिलने के बाद उन्होंने इसे ही अपने भविष्य का आधार बना लिया।

उन्होंने लगभग एक बीघा भूमि पर स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती शुरू की। पहाड़ी क्षेत्र में इस प्रकार की नगदी फसल उगाना आसान नहीं था, लेकिन कठिन परिस्थितियों को चुनौती मानकर आधुनिक तकनीकों और मेहनत के बल पर सफलता हासिल की। आज उनके खेतों में तैयार होने वाली ताजा स्ट्रॉबेरी स्थानीय बाजार में अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण विशेष पहचान बना चुकी है।

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फसल तैयार होने पर वह स्वयं अपनी कार के माध्यम से इसे विभिन्न स्थानीय बाजारों तक पहुंचाते हैं और सीधे उपभोक्ताओं को बेचते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। स्थानीय बाजार में स्ट्रॉबेरी का 300 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक भाव मिलता है।

यही कारण है कि आज वे केवल एक बीघा भूमि से प्रतिमाह लगभग 12 से 15 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बागवानी स्थायी स्वरोजगार का माध्यम बना है। परिवार के सभी सदस्य इस कार्य में उनका पूरा सहयोग करते हैं।

बालकृष्ण भविष्य के लिए भी बड़ी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लगभग दो लाख स्ट्रॉबेरी पौधों की नर्सरी तैयार की है। इनमें से करीब एक लाख पौधे वह अपने खेतों में बड़े स्तर पर लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि शेष पौधे क्षेत्र के इच्छुक किसानों को उपलब्ध करवाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक किसान स्ट्रॉबेरी की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

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उन्होंने ब्लूबेरी, एप्रीकॉट (खुमानी), प्लम तथा अन्य उच्च मूल्य वाली फल फसलों की खेती का भी लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका मानना है कि यदि किसान समय की मांग के अनुसार फसलों का चयन करें और आधुनिक तकनीकी अपनाएं तो बागबानी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। आज खेती केवल परंपरागत आजीविका नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय है। यदि सही योजना, आधुनिक तकनीक और बाजार की समझ के साथ कार्य किया जाए तो कम भूमि पर भी अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।

प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि एवं बागवानी को लाभकारी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। इन प्रयासों का परिणाम है कि अनेक युवा अब आधुनिक खेती और बागवानी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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सोमाकोठी के युवा किसान बालकृष्ण की सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकारी योजनाओं का लाभ, आधुनिक सोच, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प मिलकर खेती को लाभकारी उद्यम में बदल सकते हैं। स्ट्रॉबेरी की लालिमा से बदली उनकी तकदीर यह संदेश देती है कि यदि हौसले बुलंद हों तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता का मार्ग प्रशस्त कर देती हैं और पहाड़ों की मिट्टी भी समृद्धि की नई इबारत लिख सकती है।

Aapki Baat News Desk
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