राजगढ़ : केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि ( सीआरआईएफ ) के तहत 203.53 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिलने से शिमला, सिरमौर और किन्नौर के लाखों बागवानों को बड़ी राहत मिलेगी।
इस राशि से छैला-नेरीपुल, ओच्छघाट और कुमारहट्टी–ओच्छघाट सड़क जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को गति मिलेगी, जो प्रदेश की सेब आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की विधायक रीना कश्यप ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह स्वीकृति प्रदेश के लाखों बागवानों और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाने वाला ऐतिहासिक निर्णय है।
विधायक ने कहा कि कुमारहट्टी-ओच्छघाट मार्ग शिमला, किन्नौर और सिरमौर के बागवानों की भाग्य रेखा है। प्रदेश में सेब सीजन के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य की फसल इसी मार्ग से देशभर की मंडियों तक पहुंचाई जाती है। यही कारण है कि इस सड़क को हिमाचल की बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
उन्होंने कहा कि सड़क की खराब स्थिति और यातायात बाधित होने से बागवानों को हर वर्ष भारी परेशानी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। समय पर सेब मंडियों तक नहीं पहुंचने से गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित होते हैं।
अब सड़क के उन्नयन और आवश्यक ढांचागत विकास से परिवहन अधिक सुरक्षित, तेज और सुगम होगा, जिससे किसानों की ढुलाई लागत घटेगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। रीना कश्यप ने कहा कि इस परियोजना से केवल सेब ही नहीं, बल्कि अन्य बागवानी एवं कृषि उत्पादों के परिवहन को भी नई गति मिलेगी। साथ ही पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 203.53 करोड़ रुपये की यह स्वीकृति हिमाचल की सेब अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा शिमला और सिरमौर के साथ किन्नौर के हजारों बागवानों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
