सराहां : राज्य स्तरीय वामन द्वादशी मेला सराहां में अभी दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां जारी हैं। 23 सितंबर से शुरू हुए इस मेले का 25 सितंबर को आधिकारिक समापन हो गया।
हालांकि, जानकारी मुताबिक 2 अक्टूबर तक मेले में दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखने की प्रशासनिक अनुमति दी गई थी।
इसी बीच मेले में दुकानें लगाने वाले कारोबारियों से अतिरिक्त राशि वसूली का मामला भी सामने आया है। हैरानी इस बात की है कि ये वसूली ‘दान’ के नाम पर की जा रही है।
दान भी 10, 20 या 50 रुपये नहीं, बल्कि एक हजार रुपये या इससे अधिक लिया जा रहा है। चूंकि मीडिया के समक्ष एक हजार रुपये दान के तौर पर दुकानकर से वसूले जाने का मामला सामने आया है। जाहिर है कि दान इससे ज्यादा भी हो सकता है।
बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि मेला समाप्ति की ओर है। इससे पहले कि दुकानें यहां से उठे, दुकानदारों से दान के नाम पर वसूली हो रही है, जिसका दबे स्वर में कारोबारी विरोध भी कर रहे हैं।
मेले में दुकानें लगाने वाले कारोबारी अपने प्लाट की निर्धारित राशि पहले ही जमा कर चुके हैं। 25 सितंबर के बाद अतिरिक्त दिनों तक दुकानें लगाने की अनुमति मिलने से दुकानदारों को उम्मीद थी कि बिक्री के जरिए उन्हें शुरुआती खर्च और महंगे प्लाट की भरपाई का कुछ मौका मिलेगा, लेकिन अब अतिरिक्त राशि लिए जाने का मामला सामने आ गया। दुकानकारों से लिए जा रहे इस दान की बड़ी चर्चा हो रही है।
इस मामले में सामने आई पर्ची सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। पर्ची पर राशि प्राप्त करने के साथ ‘दान’ शब्द दर्ज है। दुकानदारों का कहना है कि उनसे तय रकम ली जा रही है।
ऐसे में सवाल यह है कि यदि यह राशि किसी निर्धारित शुल्क या तहबाजारी के रूप में ली जा रही है तो पर्ची पर संबंधित मद का स्पष्ट उल्लेख क्यों नहीं है।
दुकानदार की पहचान सुरक्षित रखने के लिए सामने आई पर्ची पर नाम और सीरियल नंबर छिपाया गया है। इससे जुड़े दस्तावेज में राशि लिए जाने का उल्लेख तो है, लेकिन ‘दान’ लिखे होने के कारण वसूली की प्रकृति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
महंगा प्लाट लेने के बाद अतिरिक्त दिनों का भी भुगतान
मेले में कारोबार करने वाले दुकानदारों का कहना है कि प्लाट के लिए पहले ही निर्धारित राशि जमा की जा चुकी है। मेले की आधिकारिक अवधि खत्म होने के बाद यदि अतिरिक्त दिनों तक दुकान लगाने की अनुमति दी गई है तो यह अवधि उनके लिए कारोबार करने और नुकसान की भरपाई का अवसर हो सकती है।
दुकानदारों का कहना है कि अतिरिक्त दिनों के लिए यदि कोई शुल्क निर्धारित किया गया है तो उसकी दर, अवधि, वसूली की मद और नियमों की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। साथ ही दुकानदारों को यह भी पता होना चाहिए कि उनसे ली जा रही राशि किस खाते में जमा होगी और उसका आधिकारिक हिसाब किस तरह रखा जाएगा।
दूसरा अहम सवाल यह है कि मेला 25 सितंबर को समाप्त होने के बाद भी मेला स्थल पर व्यावसायिक गतिविधियां किस व्यवस्था के तहत जारी हैं। यदि दुकानदारों को अतिरिक्त दिनों तक दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है तो इसकी अवधि और शर्तें क्या हैं, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
दुकानदारों से ली जा रही राशि यदि किसी निर्धारित शुल्क के रूप में है तो उसकी आधिकारिक मद क्या है? इसकी दर किस प्रस्ताव के तहत तय की गई? 25 सितंबर के बाद दुकानें कितने दिनों के लिए लगाने की अनुमति दी गई है? वसूली की रकम किस खाते में जमा की जा रही है और उसका लेखा-जोखा किस रिकॉर्ड में दर्ज होगा? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।
एसडीएम का पक्ष लेने के लिए संपर्क किया, फोन नहीं उठाया
इस मामले को लेकर एसडीएम सराहां डॉ. प्रियंका चंद्रा का पक्ष जानने के लिए 2 बार संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस कारण फिलहाल उनका पक्ष खबर में शामिल नहीं किया जा सका है। एसडीएम से संपर्क होने पर उनका पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
