शिमला : प्रदेश के 130 सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध करते हुए हिमाचल सरकार ने दाखिले से जुड़ी गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत सीबीएसई स्कूलों में बाल वाटिका यानी प्री-नर्सरी से पहली कक्षा तक दाखिला पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा, जबकि छठी से दसवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा से गुजरना होगा। 11वीं और 12वीं कक्षा में आवश्यकता के अनुसार प्रवेश परीक्षा आयोजित की जा सकेगी। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में सभी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

गाइडलाइन के अनुसार पहली से पांचवीं कक्षा तक दाखिले के लिए मौखिक परीक्षा ली जाएगी, जिसमें पिछली कक्षा में पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। छठी से दसवीं कक्षा तक लिखित प्रवेश परीक्षा अनिवार्य रहेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, अनाथ और एकल बालिका को दाखिले में प्राथमिकता दी जाएगी। पहली से 11वीं कक्षा तक लेटरी एंट्री को लेकर भी नियम तय किए गए हैं और उपलब्ध सीटों के अनुसार ही दाखिले दिए जाएंगे।
शिक्षा निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपना डिजिटल अकादमिक पोर्टफोलियो बनाए रखना अनिवार्य होगा। स्कूल हर वर्ष वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट प्रकाशित करेंगे, जिसमें शैक्षणिक उपलब्धियां, बोर्ड परीक्षा परिणाम, सह-शैक्षणिक गतिविधियां और विद्यालय विकास संकेतक शामिल होंगे। इसके साथ ही स्कूलों में शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के लिए ड्रेस कोड लागू रहेगा, जबकि ड्रेस के रंग संयोजन और स्कूल के लोगो या प्रतीक चिह्न को सरकार की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा।
व्यवस्था के तहत प्रत्येक सीबीएसई सरकारी स्कूल में छात्र कल्याण एवं सहायता केंद्र की स्थापना की जाएगी। इन केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को काउंसलिंग, करिअर मार्गदर्शन, रिमेडियल कक्षाएं और ब्रिज कोर्स जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए मनो-सामाजिक सहयोग की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है।
सीबीएसई स्कूलों के बेहतर संचालन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग राज्य चयन आयोग के माध्यम से निश्चित मानदेय के साथ पेशेवर अंग्रेजी और गणित शिक्षकों की नियुक्ति करेगा। इसमें 400 अंग्रेजी और 400 गणित शिक्षक नियुक्त किए जाएंगे। यह भर्ती अस्थाई आधार पर पांच साल की अवधि के लिए की जाएगी। नियुक्ति का निश्चित मासिक मानदेय 30 हजार रुपये प्रतिमाह होगा, जो प्रति वर्ष 10 महीनों के लिए देय होगा। विभाग इन शिक्षकों द्वारा अंग्रेजी और गणित में छात्रों की दक्षता और अधिगम स्तर में सुधार के लिए एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार करेगा, जो इन विषयों के मौजूदा पाठ्यक्रम के अतिरिक्त होगा। विभाग इन शिक्षकों को छात्रों की संख्या के अनुसार इन 130 विद्यालयों में तैनात कर सकता है और आवश्यकतानुसार अन्य सरकारी विद्यालयों में भी नियुक्त किया जा सकता है।


