
शिमला : जल शक्ति विभाग के मंडल कार्यालय कसुम्पटी द्वारा विभिन्न श्रेणियों के 40 पदों के लिए शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया पर हिमाचल किसान सभा ने सवाल उठाए हैं। किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने भर्ती में दिव्यांग वर्ग के लिए आरक्षण नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए सरकार से नियमानुसार आरक्षण देने की मांग की है।
डॉ. तंवर ने चयन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अधिसूचना में आय प्रमाणपत्र और बेरोजगारी प्रमाणपत्र का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं, मल्टीपर्पज वर्कर के पदों के लिए अनुभव प्रमाणपत्र की शर्त रखी गई है। उन्होंने कहा कि अनुभव प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित होने और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ने की आशंका है।
उन्होंने जल शक्ति विभाग में कर्मचारियों के युक्तिकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। डॉ. तंवर ने कहा कि प्रत्येक योजना के लिए कर्मचारियों की संख्या निर्धारित करने के स्पष्ट मापदंड होने चाहिए।
उन्होंने कोटी जल शक्ति उपमंडल की एक पंचायत का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 1200 की आबादी वाली पंचायत में दो सिंचाई और दो पेयजल योजनाओं के लिए करीब 15 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से 10 कर्मचारी केवल दो पेयजल योजनाओं में कार्यरत हैं।
वहीं, बेरोजगार युवाओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 की भर्ती में भी आय और बेरोजगारी प्रमाणपत्र नहीं मांगे गए थे, जिससे आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के युवाओं को लाभ मिला।
युवाओं का आरोप है कि मल्टीपर्पज वर्कर के पदों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास होने के बावजूद तकनीकी डिप्लोमा धारकों का चयन किया गया। उनका कहना है कि मौजूदा भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र की शर्त के चलते बेरोजगार युवाओं को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ठेकेदारों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
उधर, अधीशासी अभियंता जल शक्ति मंडल कसुम्पटी विनोद शर्मा ने कहा कि भर्ती सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर की जा रही है और चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।
