शिमला : जुन्गा तहसील की 12 पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला सिविल अस्पताल आज भी 108 नेशनल एंबुलेंस सेवा से वंचित है। इसके चलते आपात स्थिति में मरीजों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को निजी या किराये के वाहनों के सहारे अस्पताल पहुंचना पड़ता है। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में जल्द 108 एंबुलेंस सेवा शुरू करने की मांग उठाई है।
अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 100 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, जबकि हर महीने 100 से ज्यादा मरीज भर्ती होकर इलाज कराते हैं। इसके बावजूद यहां अब तक 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं करवाई गई है। अस्पताल में चतुर्थ श्रेणी और सफाई कर्मचारियों समेत विभिन्न श्रेणियों के करीब 15 पद लंबे समय से रिक्त हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर, अल्ट्रासाउंड और आधुनिक लैब जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। क्षेत्र में निजी डायग्नोस्टिक लैब नहीं होने के कारण मरीजों को जांच के लिए शिमला जाना पड़ता है।
जिला परिषद सदस्य खुश विक्रम सेन ने बताया कि जुन्गा तहसील के किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में 108 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने करीब दो वर्ष पहले सीएचसी कोटी के लिए 108 एंबुलेंस सेवा की घोषणा की थी, लेकिन यह अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप तंवर ने कहा कि अस्पताल में सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ की तत्काल जरूरत है। फ्रैक्चर और अन्य जटिल मामलों में मरीजों को शिमला रेफर करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि करीब 50 वर्ष पुराने इस अस्पताल में आज तक ऑपरेशन थियेटर के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इस वजह से एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की सेवाएं भी वर्तमान में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल चमियाणा में ली जा रही हैं। सक्षम चिकित्सक होने के बावजूद भी ओटी सुविधा के अभाव में मरीजो को शिमला रेफर करना पड़ रहा है।
डॉ. तंवर ने बताया कि अस्पताल में 50 बिस्तर स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में केवल 25 बिस्तर ही क्रियाशील हैं। उन्होंने अस्पताल भवन के विस्तार, रिक्त पदों को भरने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति तथा आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की।
स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या को देखते हुए सिविल अस्पताल जुन्गा में 108 एंबुलेंस सेवा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग सरकार से दोहराई है।
