राजगढ़ : ग्रामीण परिवेश में 45 दिन उपरांत रसोई गैस बुक करवाने के तय नियम बदलने की मांग उठने लगी है। दरअसल, इन नियमों के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की किल्लत होने लगी है। लिहाजा, लोगों को भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। राजगढ़ क्षेत्र के राकेश कुमार, नेक राम, प्रीतम ठाकुर, मनोहर सिंह, जयराम आदि लोगों का कहना है कि सरकार ने एक तरफ रसोई गैस के दाम में बढ़ोतरी कर दी है, दूसरी ओर सिलेंडर बुक करने की अवधि को भी 30 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया है। इससे ग्रामीण दोहरी मार झेल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में जलाने वाली लकड़ी का अभाव हो गया है। रसोई गैस के कारण लोगों ने ईंधन की लकड़ी एकत्रित करना भी छोड़ दिया है। दूसरी ओर ग्रामीण परिवेश में अधिकतर परिवार संयुक्त रूप से रहते हैं, जहां एक रसोई गैस सिलेंडर करीब 20 से 25 दिन तक बड़ी मुश्किल से चलता है। रसोई गैस बुक करने के लिए 45 दिन निर्धारित होने से अनेक परिवारों में रसोई गैस की समस्या उत्पन्न हो गई है। विशेषकर जो कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें रसोई गैस न होने से काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि ग्रामीण परिवेश में कोई होटल ढाबा भी नहीं होता।
लोगों का कहना है कि जिस प्रकार रसोई गैस की समस्या गंभीर बनती जा रही है, उससे वनों पर भी दबाव बढ़ेगा और पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ जाएगा। हालांकि, गैस एजेंसी राजगढ़ में रसोई गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जहां से राजगढ़ व साथ लगते क्षेत्र की 49 पंचायतों में एलपीजी की आपूर्ति होती है। क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि रसोई गैस सिलेंडर की पहले की भांति आपूर्ति की जाए, ताकि लोग आसानी से जीवन यापन कर सकें। खाद्य एवं आपूर्ति निरीक्षक राजगढ़ पदमदेव ने बताया कि भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन उपरांत रसोई गैस बुक की अवधि तय की है। सरकार ही नियम में बदलाव कर सकती है।


