ऊना : प्रदेश के हजारों मछुआरों की आजीविका को स्थायित्व देने की दिशा में सुक्खू सरकार के फैसलों ने उन्हें बड़ा हौंसला दिया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना के तहत अब जलाशयों से प्राप्त मछली की खरीद 100 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सुनिश्चित की जाएगी। इससे मछुआरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने के साथ आय में स्थिरता आएगी। ऊना जिला के कुटलैहड़ क्षेत्र में गोविंद सागर झील पर निर्भर बड़ी संख्या में मछुआरा परिवार इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट भाषण में यह भी कहा है कि यदि नीलामी में मछली का मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम रहता है, तो सरकार अधिकतम 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक का अंतर डीबीटी के माध्यम से सीधे मछुआरों के खातों में देगी। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और मत्स्य पालन एक सुरक्षित एवं भरोसेमंद व्यवसाय के रूप में उभरेगा।
मछुआरों को राहत देते हुए सरकार ने जलाशयों पर लगने वाली रॉयल्टी को 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया है, जिसे अगले वित्त वर्ष में घटाकर मात्र एक प्रतिशत करने की घोषणा भी की गई है। इस निर्णय से प्रदेश के छह हजार से अधिक जलाशय आधारित मछुआरों को सीधा लाभ मिलेगा।
इसके अलावा, वर्षा ऋतु में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान होने वाली आय हानि की भरपाई के लिए मछुआरा परिवारों को 3500 रुपये वार्षिक सम्मान निधि प्रदान की जाएगी। चार हजार नदीय मछुआरों को कास्ट नेट तथा तीन हजार जलाशय मछुआरों को गिल नेट पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, जरूरतमंद मछुआरों को नौका खरीद पर 70 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाएगी।
योजना के तहत मत्स्य क्षेत्र के आधारभूत ढांचे को भी सुदृढ़ किया जाएगा। 5 मीट्रिक टन क्षमता की 20 कोल्ड स्टोरेज इकाइयों और 10 फ्रीज-ड्राई इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा। मछलियों को दिल्ली और चंडीगढ़ जैसी प्रमुख मंडियों तक पहुंचाने के लिए 20 रेफ्रिजरेटेड वाहनों की खरीद पर भी 70 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा।
बता दें, कुटलैहड़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग मत्स्य पालन से जुड़े हैं और गोविंद सागर झील पर निर्भर यह समुदाय लंबे समय से स्थिर आय और बेहतर समर्थन मूल्य की मांग कर रहा था। ऐसे में यह योजना उनके लिए राहत और विश्वास दोनों लेकर आई है।
लठियानी के सुशील कुमार का कहना है कि एमएसपी लागू होने से अब उन्हें मछली का उचित मूल्य मिलेगा और उनकी मेहनत को सुरक्षा मिलेगी। वहीं, कृष्ण कुमार के अनुसार यह पहल मछुआरों के जीवन में स्थिरता लाने के साथ उन्हें इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रदेश में हजारों परिवार प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना मछुआरों की आय को सुदृढ़ करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
