हैदराबाद में बेबस हुआ हिमाचल का किसान पिता, एक आंख खो चुका मासूम, दूसरी बचाने की जंग

किसान मनीष शर्मा का लाडला हिमानीश अपनी एक आंख की रोशनी पूरी तरह खो चुका है और अब उसके परिवार की दिन-रात की यही एक प्रार्थना है कि किसी तरह बच्चे की दूसरी आंख सुरक्षित रह जाए। करीब ढाई साल पहले जब अचानक हिमानीश की एक आंख की रोशनी चली गई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर इतना लंबा और कष्टदायी होगा।

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नाहन : जिला सिरमौर के नाहन विधानसभा क्षेत्र की चाकली पंचायत के सरोगा टिक्कर गांव का 9 वर्षीय मासूम हिमानीश इन दिनों जीवन की एक ऐसी कठिन परीक्षा से गुजर रहा है, जिसकी कल्पना मात्र से भी रूह कांप जाती है। महज साढ़े छह साल की उम्र में शुरू हुई रेटिनोब्लास्टोमा (आंखों का कैंसर) जैसी गंभीर बीमारी ने इस मासूम के बचपन को अस्पताल की दीवारों और दवाइयों की गंध के बीच कैद कर दिया है। किसान मनीष शर्मा का लाडला हिमानीश अपनी एक आंख की रोशनी पूरी तरह खो चुका है और अब उसके परिवार की दिन-रात की यही एक प्रार्थना है कि किसी तरह बच्चे की दूसरी आंख सुरक्षित रह जाए।

करीब ढाई साल पहले जब अचानक हिमानीश की एक आंख की रोशनी चली गई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर इतना लंबा और कष्टदायी होगा। पीजीआई चंडीगढ़ में जांच के बाद जब कैंसर की पुष्टि हुई और एक-एक इंजेक्शन की कीमत एक लाख रुपये बताई गई, तो किसान पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। अपने कलेजे के टुकड़े को बचाने की उम्मीद में मनीष उसे हैदराबाद के सेंटर फॉर साइट अस्पताल ले गए। वहां संक्रमण को रोकने के लिए डॉक्टरों ने हिमानीश की एक आंख निकाल दी। पिछले दो वर्षों से इस मासूम का इलाज लगातार हैदराबाद में ही चल रहा है।

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मनीष शर्मा ने नम आंखों से बताया कि अब तक महंगे इलाज और यात्रा पर वह 12 से 13 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। एक छोटे किसान के लिए यह राशि जुटाना असंभव था, इसलिए उन्होंने सगे-संबंधियों और परिचितों के आगे हाथ फैलाकर और कर्ज लेकर मासूम की सांसों की डोर थामे रखी है। हालांकि, नाहन के विधायक अजय सोलंकी के माध्यम से मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये और सहारा योजना से मासिक मदद मिली है, लेकिन हैदराबाद की महंगी चिकित्सा के आगे यह ये आर्थिक मदद भी कम पड़ रही है। मनीष ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि हैदराबाद में आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड की सुविधा न मिल पाने के कारण उन्हें सबसे बड़ी आर्थिक चोट लगी है। यदि ये सरकारी स्वास्थ्य कार्ड वहां मान्य होते, तो शायद उन्हें आज पाई-पाई के लिए दर-दर न भटकना पड़ता।

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वर्तमान में हिमानीश की दूसरी आंख सुरक्षित है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार ट्यूमर का खतरा करीब पांच वर्षों तक बना रहता है। अब तक 12 बार कीमोथैरेपी हो चुकी है। इसके साथ साथ एक माह रेडियोथैरेपी चली। पहली बार 6 माह चली कीमोथैरेपी के बाद आपरेट कर आंख निकाली। अब पूरा परिवार सांसें थामकर अगली रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए मनीष शर्मा ने अब समाज और सरकार से झोली फैलाकर गुहार लगाई है। एक पिता की यह मार्मिक पुकार अब उन सभी संवेदनशील हाथों के लिए है, जो हिमानीश की दूसरी आंख की रोशनी सलामत रखने में मददगार बन सकते हैं, ताकि हिमाचल का यह बेटा फिर से सुनहरे भविष्य का सपना देख सके।

मनीष शर्मा ने बताया कि फिलहाल दूसरी आंख सुरक्षित है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार पांच साल तक ट्यूमर का खतरा बना रहता है। अब तक दो बार कीमोथैरेपी हो चुकी है और इलाज की अंतिम रिपोर्ट आना अभी बाकी है। हैदराबाद से बच्चे का इलाज सही दिशा में चल रहा है, लेकिन ट्यूमर पूरी तरह खत्म करने के लिए अभी लंबा इलाज जरूरी बताया गया है।

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उन्होंने बताया कि इलाज के लिए बार-बार हैदराबाद आना-जाना, वहां ठहरने और खाने-पीने का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। किसान परिवार से होने के कारण खेती-बाड़ी से इतनी आमदनी नहीं है कि वह इस स्तर का इलाज लंबे समय तक जारी रख सकें। अब तक का खर्च भी सरकार और रिश्तेदारों की मदद से ही संभव हो पाया है। आगे इलाज में कितना खर्च आएगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।