मिलिए… सिरमौर की ‘सुपर मॉम और बेटे’ से.. दोनों ने गोल्ड मेडल जीत देश में लहराया परचम, हिमाचल के इतिहास में शायद ऐसा पहली बार

कहते हैं कि प्रतिभा विरासत में मिलती है और नाहन के एक परिवार ने इस बात को सच कर दिखाया है। खेल जगत में हिमाचल प्रदेश की एक मां और उनके बेटे की कामयाबी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिस वक्त बेटे ने उत्तराखंड के देहरादून में मार्शल आर्ट के दांव-पेंचों से प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर गोल्ड मेडल जीता, ठीक उसी समय मां पुणे में नेशनल मास्टर्स गेम्स में प्रदेश का परचम लहरा रही थीं।

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नाहन : कहते हैं कि प्रतिभा विरासत में मिलती है और नाहन के एक परिवार ने इस बात को सच कर दिखाया है। खेल जगत में हिमाचल प्रदेश की एक मां और उनके बेटे की कामयाबी चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जिस वक्त बेटे ने उत्तराखंड के देहरादून में मार्शल आर्ट के दांव-पेंचों से प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर गोल्ड मेडल जीता, ठीक उसी समय मां पुणे में नेशनल मास्टर्स गेम्स में प्रदेश का परचम लहरा रही थीं। यहां बात हो रही है अंतरराष्ट्रीय एथलीट सीमा परमार और उनके 17 वर्षीय बेटे समरवीर सिंह रोहिला की, जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से न केवल सिरमौर, बल्कि पूरे हिमाचल का नाम रोशन किया है।

देहरादून में आयोजित तीसरी ऑल इंडिया पेंचक सिलट मार्शल आर्ट प्रतियोगिता में समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इस नेशनल इवेंट में 1200 से अधिक खिलाड़ियों के बीच समरवीर की यह जीत बेहद खास रही। हिमाचल की टीम ने पेंचक सिलट प्रतियोगिता में कुल 10 पदक जीते, जिसमें सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इनमें से 8 पदक अकेले सिरमौर जिले के खिलाड़ियों ने झटके। पेंचक सिलट प्रतियोगिता में सिरमौर जिले के समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में गोल्ड जीता तो वहीं मंडी जिले की किरत कमल कौर, सिरमौर की सहना, सिरमौर की बियनका तनेजा, नविका शर्मा, मंडी के अर्श वैद्य ने सिल्वर मेडल जीते, जबकि सिरमौर की तृषि वर्मा, देवांशी पाठे और मनन चौहान ने ब्रॉन्ज मेडल जीते।

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वहीं, दूसरी ओर पुणे में आयोजित 8वीं नेशनल मास्टर्स गेम्स में सीमा परमार ने 50 प्लस आयु वर्ग में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। सीमा परमार ने हैमर थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा बैडमिंटन, डिस्कस थ्रो व वॉलीबॉल जैसी स्पर्धाओं में भी अपना जलवा दिखाते हुए पदक हिमाचल के खाते में डाले। इसमें एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल है। दिलचस्प बात है कि खेल जगत में हिमाचल से मां-बेटे की यह अपनी तरह की पहली उपलब्धि हो सकती है, जब एक ही समय में देश के अलग-अलग कोनों में मां-बेटे ने न केवल देवभूमि का नाम गौरवांवित किया, बल्कि सही मायनों में सिरमौर के अर्थ (सिर का ताज) को भी सार्थक कर दिखाया।

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बता दें कि सीमा परमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धौण में इतिहास की प्रवक्ता के पद पर तैनात हैं। उनके परिवार में उनकी बेटी हर्षिता रोहिला (19) भी एथलीट हैं। पिता हरीष रोहिला खेलकूद से जुड़ी अहम टैक्नीक की अच्छी परख रखते हैं। लिहाजा, पिता के मार्गदर्शन और मां सीमा परमार की प्रेरणा से उनके बच्चे भी खेल के क्षेत्र में नित नई उपलब्धियां नाम कर रहे हैं। खेल जगत में कई कामयाबियां हासिल करने वाली सीमा परमार इस बात से फूले नहीं समा रही हैं कि उनकी दिखाई राह पर चलकर बेटा भी आगे बढ़ रहा है। मां सीमा परमार और पिता हरीष रोहिला का कहना है कि ये उनके लिए काफी सुखद पहलु है कि खेलकूद के क्षेत्र में अब उनकी अगली पीढ़ी ने भी अपनी इस विरासत को संभाल लिया है।

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