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नाहन नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर आखिर क्या है बड़ा सस्पेंस, बहुमत में भाजपा, ताक में कांग्रेस

नगर परिषद नाहन चुनाव के नतीजे आने के बाद अब असली सियासी जंग अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है। 13 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा ने 7 सीटें जीतकर बहुमत जरूर हासिल किया है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर तेज हुई अंदरूनी खींचतान ने राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा दिया है।

नाहन : नगर परिषद नाहन चुनाव के नतीजे आने के बाद अब असली सियासी जंग अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर शुरू हो गई है। 13 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा ने 7 सीटें जीतकर बहुमत जरूर हासिल किया है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर तेज हुई अंदरूनी खींचतान ने राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा दिया है। दूसरी ओर 6 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस अब भाजपा के भीतर चल रही हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए है।

बता दें कि इस बार नाहन नगर परिषद का अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित हुआ है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा में अध्यक्ष पद को लेकर अंतरखाते कई दावेदार सक्रिय हो चुके हैं। मिलनसार और खुश मिजाज स्वभाव की पूजा तोमर को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। पूजा तोमर नगर परिषद की पूर्व चेयरमैन रहीं स्व. रेखा तोमर की पुत्रवधू हैं और पहली बार ही चुनावी मैदान में कूदकर अपने सिर जीत का सेहरा बांधा। वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की धर्म बहन भी हैं। पूजा के पति विशाल तोमर शहर में अपना अच्छा रुतबा रखते हैं और पूर्व में रोड सेफ्टी क्लब के अध्यक्ष भी रहे हैं।

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वहीं, सीमा अत्री पूर्व पार्षद स्व. मधु अत्री की पुत्रवधू हैं और वह भी पहली बार चुनावी दंगल में कूदी। खास बात ये रही कि उन्होंने सबसे बड़े अंतर से चुनाव जीतने का रिकार्ड बनाया। वहीं, संध्या अग्रवाल लगातार दूसरी बार जीतकर आई हैं। इस वजह संध्या भी इस दौड़ में शामिल हैं, लेकिन पूर्व में अपनी ही नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलने और बगावती तेवर अपनाने के कारण उनकी राह काफी चुनौती भरी है। इसके साथ साथ संजना कौर और कौशल्या देवी भी अपने-अपने वार्डों की जीत कर आई हैं।

हालांकि, अभी किसी की खुलकर दावेदारी सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने चल रही बैठकों और समर्थकों की सक्रियता ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। भाजपा के भीतर फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अंदरूनी संतुलन बनाए रखना माना जा रहा है। पार्टी के कई खेमे अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस भी पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है और भाजपा के भीतर पैदा हो रही स्थिति को अपने लिए अवसर के रूप में देख रही है।

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स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार नगर परिषद की राजनीति केवल संख्या बल तक सीमित नहीं रहने वाली। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने और स्थानीय कांग्रेस विधायक के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए पार्टी हर संभावित विकल्प खुला रखना चाहती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यदि भाजपा के भीतर सहमति बनने में देरी होती है तो राजनीतिक समीकरण अचानक बदल भी सकते हैं।

अब नाहन की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि भाजपा संगठन किसी एक चेहरे पर सर्वसम्मति बना पाएगा या फिर अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर जारी अंदरूनी हलचल आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मोड़ लेगी। फिलहाल नगर परिषद का गणित जितना आसान दिखाई देता है, जमीनी स्तर पर उतने ही उलझे हुए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।

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Aapki Baat News Desk
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