पांवटा साहिब : नगर परिषद पांवटा साहिब के चुनाव परिणामों ने इस बार स्थानीय राजनीति की कई परतें खोल दी हैं। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले पांवटा साहिब में न तो भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल कर पाई और न ही कांग्रेस सत्ता तक पहुंच सकी।
13 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस दोनों चार-चार सीटों पर सिमट गईं, जबकि पांच निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज कर पूरी सियासी तस्वीर ही बदल दी। अब नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सी निर्दलीयों के समर्थन पर तय होगी और इसी के साथ पांवटा की राजनीति में जोड़तोड़, रणनीति और अंदरूनी समीकरणों का खेल तेज हो गया है।
सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के प्रदर्शन को लेकर हो रही है। पांवटा साहिब को लंबे समय से भाजपा का मजबूत किला माना जाता रहा है और इसका सबसे बड़ा कारण विधायक सुखराम चौधरी (Sukhram Chaudhary) का मजबूत जनाधार रहा है, लेकिन इस बार बीमारी के चलते सुखराम चौधरी चुनावी मैदान में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पाए, जिसका असर सीधे चुनाव परिणामों में दिखाई दिया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सुखराम चौधरी पूरी तरह मैदान में होते तो तस्वीर कुछ और हो सकती थी।
भाजपा के भीतर संगठनात्मक स्तर पर भी इस चुनाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष धीरज गुप्ता (Dheeraj Gupta) की रणनीति और टिकट प्रबंधन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच ही नाराजगी की चर्चाएं तेज हैं। सबसे बड़ा झटका वार्ड नंबर 12 में देखने को मिला, जहां जिला अध्यक्ष अपनी ही बहन को जीत नहीं दिलवा सके और उन्हें 123 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इस हार ने संगठन की जमीनी पकड़ और नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांवटा साहिब में भाजपा का ग्राफ पिछले कुछ समय से लगातार नीचे जा रहा है। संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी तथा स्थानीय स्तर पर बढ़ती गुटबाजी ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया। यही वजह रही कि कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के समीकरण बिगाड़ दिए।
दूसरी ओर कांग्रेस भी इस चुनाव में कोई बड़ा राजनीतिक संदेश देने में सफल नहीं रही। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी का असर साफ नजर आया। कांग्रेस चार सीटें जीतने के बावजूद बहुमत से दूर रह गई। हालांकि पार्टी समर्थक इसे भाजपा के गढ़ में सेंध के रूप में देख रहे हैं, लेकिन निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी ने कांग्रेस की राह भी आसान नहीं रहने दी।
इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत बनकर उभरी है। वार्ड नंबर 8, 9, 10, 12 और 13 से जीतकर आए निर्दलीय पार्षद अब “किंगमेकर” की भूमिका में हैं। नगर परिषद का अगला अध्यक्ष कौन होगा, यह अब इन्हीं निर्दलीयों के रुख पर निर्भर करेगा। चुनाव परिणाम आने के बाद से ही दोनों दलों के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है और समर्थन जुटाने के लिए अंदरखाने बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।
पांवटा साहिब की राजनीति में यह परिणाम केवल एक नगर परिषद चुनाव का नतीजा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा समीकरणों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा के लिए यह परिणाम चेतावनी है तो कांग्रेस के लिए भी आत्ममंथन का विषय बन गया है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों की इस ताकत ने साफ कर दिया है कि जनता अब स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत पकड़ को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर फैसला लेने लगी है।
भारतीय जनता पार्टी की ओर से वार्ड नंबर 1 से निर्मल कौर, वार्ड नंबर 2 से आशा देवी, वार्ड नंबर 3 से राजरानी और वार्ड नंबर 5 से सर्वशक्ति भटनागर विजयी रहे। वहीं कांग्रेस की ओर से वार्ड नंबर 4 से कविता देवी, वार्ड नंबर 6 से इंद्रप्रीत कौर, वार्ड नंबर 7 से रविंदर पाल सिंह और वार्ड नंबर 11 से रीना कुमारी ने जीत दर्ज की।
निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी इस चुनाव में दमदार प्रदर्शन किया। वार्ड नंबर 8 से डॉ. रोहताश नागिया, वार्ड नंबर 9 से इंद्रजीत सिंह, वार्ड नंबर 10 से मयंक चौहान, वार्ड नंबर 12 से ममता और वार्ड नंबर 13 से कुलदीप चौधरी जीतकर नगर परिषद पहुंचे हैं। अब यही पांच निर्दलीय प्रत्याशी परिषद गठन में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।
वार्ड नंबर 1 में निर्मल कौर को 633 वोट मिले, जबकि अवतार सिंह को 216 वोट पड़े। वार्ड नंबर 2 में आशा देवी ने 700 वोट हासिल कर जीत दर्ज की और सुदेश को 179 वोट मिले। वार्ड नंबर 3 में राजरानी को 568 वोट मिले, जबकि मोनिका बाली को 243 वोट प्राप्त हुए।
वार्ड नंबर 4 में कांग्रेस प्रत्याशी कविता देवी ने बेहद करीबी मुकाबले में 369 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि दीपा शर्मा को 356 वोट मिले। वार्ड नंबर 5 में सर्वशक्ति भटनागर को 397 वोट मिले और हरविंदर कौर को 326 वोट प्राप्त हुए।
वार्ड नंबर 6 में इंद्रप्रीत कौर को 499 वोट मिले, जबकि सुमन गर्ग को 464 वोट हासिल हुए। वार्ड नंबर 7 में रविंदर पाल सिंह ने 579 वोट लेकर जीत दर्ज की, जबकि मयंक महावर को 372 वोट मिले।
वार्ड नंबर 8 में डॉ. रोहताश नागिया को 466 वोट मिले और संजय सिंघल को 340 वोट प्राप्त हुए। वार्ड नंबर 9 में इंद्रजीत सिंह 474 वोट लेकर विजयी रहे, जबकि राजेंद्र सिंह को 252, नवीन शर्मा को 247 और मधुकर डोगरी को 193 वोट मिले।
वार्ड नंबर 10 में मयंक चौहान ने 400 वोट लेकर जीत दर्ज की। यहां सतीश कुमार को 235, ओम प्रकाश कटारिया को 186 और अमित कुमार को 152 वोट मिले। वार्ड नंबर 11 में रीना कुमारी को 569 वोट मिले, जबकि कृष्णा देवी को 263 वोट प्राप्त हुए।
वार्ड नंबर 12 में ममता ने 520 वोट लेकर जीत दर्ज की। यहां सुमन गुप्ता को 397 वोट मिले। वार्ड नंबर 13 में कुलदीप चौधरी 420 वोट लेकर विजयी रहे, जबकि अखिल को 286 और मोहिंद्र सिंह को 282 वोट मिले।