शिमला : हिमाचल प्रदेश में मानसून ने तबाही मचा दी है। भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रदेश को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। किन्नौर में बाढ़ के बाद मलबा आने से शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग कई घंटे बंद रहा और दो कारें मलबे की चपेट में आने से बड़ा हादसा टल गया।
किन्नौर जिले के चोलिंग में गत शुक्रवार तड़के तेज बारिश के बाद आई बाढ़ से करीब 30 मीटर हिस्से में मलबा जमा होने के कारण शिमला-रिकांगपिओ राष्ट्रीय राजमार्ग सुबह करीब चार बजे बंद हो गया। करीब 10 बजे मलबा हटाने के बाद यातायात बहाल किया गया। इस दौरान वहां से गुजर रही दो कारें भी मलबे की चपेट में आ गईं, लेकिन दोनों वाहन मौके पर ही रुक गए और कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं, रिब्बा में बाढ़ के कारण रिब्बा-कंडे संपर्क मार्ग भी वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो गया है।
स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून से अब तक मौसम संबंधी घटनाओं में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि खराब मौसम के दौरान हुई सड़क दुर्घटनाओं में दो अन्य लोगों ने जान गंवाई है। इस तरह मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 14 पहुंच गया है।
48 ट्रांसफार्मर ठप, 27 पेयजल योजनाएं बाधित
इस मानसून सीजन में 48 ट्रांसफार्मर ठप हैं और 27 पेयजल योजनाएं बाधित हैं। प्रदेश में सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था भी भारी बारिश से प्रभावित हुई है। कई जिलों में प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें मलबा हटाने और आवश्यक सेवाएं बहाल करने में जुटी हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मानसून की शुरुआत के बाद तीन दिनों में प्रदेश को करीब 16 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस अवधि में 30.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 106 प्रतिशत अधिक है। किन्नौर में 18.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य से 423 प्रतिशत अधिक रही।
लाहौल-स्पीति को छोड़कर प्रदेश के लगभग सभी जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते प्रदेश में अब भी 49 सड़कें और तीन ट्रांसफार्मर बंद हैं।
