
मंडी : स्वतंत्रता दिवस के जश्न से पहले छोटी काशी मंडी ने देशभक्ति और तकनीक का ऐसा संगम रचा, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया। 14 अगस्त को डाक विभाग ने देश में पहली बार ड्रोन के जरिए तिरंगे की डिलीवरी कर इसे सीधे एक आर्मी वेटरन के घर तक पहुंचाया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी बने, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस विशेष डिलीवरी से जुड़े।
मंडी से रेहड़धार तक आसमान के रास्ते पहुंचा तिरंगा
मुख्य डाकघर मंडी से ड्रोन ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर उड़ान भरी और रेहड़धार शाखा डाकघर पहुंचा। यहां डाक विभाग की टीम ने तिरंगे से भरा पार्सल प्राप्त किया और इसे औपचारिक रूप से सेना के एक पूर्व सैनिक को सौंपा।
यह सिर्फ एक डिलीवरी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले देशभक्ति, तकनीकी नवाचार और जनसेवा का अनूठा उदाहरण बन गई। खास बात यह रही कि डाक विभाग ने पहली बार ड्रोन तकनीक के जरिए तिरंगे को निर्धारित स्थान तक पहुंचाने का प्रयोग किया।
केंद्रीय मंत्री भी बने ऐतिहासिक पल के गवाह
केंद्रीय डाक एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंडी प्रधान डाकघर से ड्रोन की लाइव उड़ान से जुड़े। उन्होंने डाक अधिकारियों और ड्रोन परिचालक से बातचीत की तथा रेहड़धार तक तिरंगे की यात्रा को देखा।
सिंधिया ने हिमाचल के आसमान से तिरंगे की इस यात्रा को नए भारत की भावना का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल भौगोलिक बाधाओं को पार कर प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने के संकल्प को दर्शाती है।
दुर्गम इलाकों में नई राह दिखाएगा ड्रोन
मंडी से रेहड़धार तक की यह ड्रोन डिलीवरी केवल स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा प्रयोग नहीं है, बल्कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में डाक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। ड्रोन तकनीक भारतीय डाक के व्यापक नेटवर्क के साथ जुड़कर कठिन इलाकों में अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने में मदद कर सकती है।
भारतीय डाक विभाग ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत नागरिकों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचा रहा है। विभाग ने हिमाचल प्रदेश और असम में 150 मार्गों पर ड्रोन आधारित डाक सेवा शुरू करने की योजना भी बनाई है।
