राजगढ़ : राजकीय महाविद्यालय पझौता, जिला सिरमौर की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) स्वयंसेवी कविता चौहान ने देहरादून में आयोजित वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकीकरण शिविर में हिमाचल प्रदेश और जिला सिरमौर का प्रतिनिधित्व कर महाविद्यालय का नाम रोशन किया।
भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित यह शिविर 30 सितंबर से 6 अक्तूबर तक चला।
शिविर में केरल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित छह राज्यों के 150 एनएसएस स्वयंसेवियों ने भाग लिया। इनमें हिमाचल प्रदेश के 25 स्वयंसेवी शामिल रहे, जबकि सिरमौर जिले से दो स्वयंसेवियों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला।
शिविर का उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना तथा विभिन्न राज्यों की संस्कृति, परंपराओं और विचारों के बीच आपसी समझ एवं समन्वय को बढ़ावा देना रहा।
इस दौरान स्वयंसेवियों के लिए विभिन्न विषयों पर व्याख्यान, संवादात्मक एवं तकनीकी सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां आयोजित की गईं। 30 सितंबर को हुए उद्घाटन समारोह में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कविता चौहान ने शिविर के उद्घाटन से लेकर समापन समारोह तक विभिन्न कार्यक्रमों में मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाली। आत्मविश्वास और प्रभावी मंच संचालन के लिए उनकी विशेष सराहना की गई। सिरमौर के धामला गांव की निवासी कविता इससे पहले कांगड़ा और नाहन में आयोजित तीन यूथ एक्सचेंज कार्यक्रमों में भी भाग ले चुकी हैं।
समापन अवसर पर कविता चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण शिविर में विभिन्न राज्यों से आए युवाओं के साथ समय बिताना उनके लिए प्रेरणादायक और यादगार अनुभव रहा।
उन्होंने कहा कि शिविर के माध्यम से उन्हें देश की विविध संस्कृतियों और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिला, जिससे राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता की भावना और मजबूत हुई।
उन्होंने कहा कि शिविर से मिले अनुभव, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का उपयोग वह आगे एनएसएस गतिविधियों के साथ-साथ समाज और राष्ट्रहित में भी करेंगी।
महाविद्यालय की एनएसएस इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रकाश शर्मा ने कविता चौहान की उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के शिविर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता और व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कविता की उपलब्धि महाविद्यालय के अन्य स्वयंसेवियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने कविता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
