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TB free India campaign: सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचेगी ऐसी एक्स-रे मशीन, घर पर होगी जांच

इसके तहत जिला में करीब 75,000 ऐसे लोगों की स्क्रीनिंग की जानी है, जिनमें टीबी होने की संभावना है. इन लोगों को 16 कैटागिरी में बांटा गया है. जिला में ये अभियान तेजी से चल रहा है. इसी के तहत अब जल्द ही पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन (Portable x-ray machine) से मरीजों की जांच होगी.

(TB free india campaign) नाहन : जिला सिरमौर के दुर्गम इलाकों में अब पोर्टेबल (हाथ में पकड़ने योग्य) एक्स-रे मशीन से टीबी मरीजों की जांच करने की तैयारी है. इसके लिए मरीज को अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि विभागीय कर्मी अब घरद्वार पहुंच संबंधित मरीज का एक्स-रे करेंगे. रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि होने के बाद ही मरीज को अस्पताल भेजा जाएगा. इससे जिला में चल रहे टीबी स्क्रीनिंग अभियान में भी और अधिक तेजी आएगी. दरअसल, जिला सिरमौर में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है.
इसके तहत जिला में करीब 75,000 ऐसे लोगों की स्क्रीनिंग की जानी है, जिनमें टीबी होने की संभावना है. इन लोगों को 16 कैटागिरी में बांटा गया है. जिला में ये अभियान तेजी से चल रहा है. इसी के तहत अब जल्द ही पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन (Portable x-ray machine) से मरीजों की जांच होगी. चंद दिनों में यह पोर्टेबल मशीन विभाग को उपलब्ध हो जाएगी.
सीएमओ सिरमौर डा. अजय पाठक ने बताया कि इसी सप्ताह विभाग को पोर्टेबल हैंड हेल्ड एक्सरे मशीन मिलने की संभावना है. यह सुविधा शुरू होने के बाद दुर्गम क्षेत्रों में इसी एक्सरे मशीन की मदद से टीबी का पता लगाने के लिए संभावित मरीजों के एक्सरे किए जाएंगे. सीएमओ ने जिलावासियों से अपील करते हुए कहा कि टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करवाएं और टीबी मुक्त हिमाचल बनाने में सहयोग करें.

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टीबी मरीजों के फॉलोअप के निर्देश
सीएमओ ने टीबी मरीजों का फॉलोअप करने के भी निर्देश संबंधित स्टाफ को दिए. हर 6 महीने बाद 2 वर्षों तक इसका फॉलोअप किया जाना चाहिए. सीएमओ ने निर्देश दिए कि टीबी के मरीज के परिवार के किसी एक सदस्य को संबंधित रोग को लेकर विस्तार से जागरूक किया जाए. साथ ही परिवार के उक्त सदस्य का फोन नंबर, नाम व पता भी लिया जाए, ताकि समय-समय पर इस दिशा में जागरूक किया जा सके.

क्या होती है पोर्टेबल एक्सरे मशीन?
दरअसल, किसी भी तरह के एक्सरे के लिए मरीज को अस्पताल जाना पड़ता है, लेकिन पोर्टेबल एक्स-रे मशीन एक ऐसी मशीन होती है, जिसे आपातकालीन कक्षों, आपातकालीन देखभाल केंद्रों, प्राकृतिक आपदा स्थलों, रोगी के घर या बुजुर्गों की देखभाल सुविधाओं और यहां तक कि क्लीनिकों में संयुक्त उपयोग सहित विभिन्न सेटिंग्स में उपयोग किया जा सकता है. वहीं जिला को मिलने वाली यह पोर्टेबल मशीन फिलहाल टीबी के संभावित मरीजों के ही एक्सरे करेगी।

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रेडिएशन का भी नहीं कोई खतरा
इस मशीन को लैपटॉप के साथ जोड़ा जाएगा. इसमें कैमरा भी लगा होगा. कैमरे की मदद से ही फैफड़ों का एक्स-रे होगा. इसके तुरंत बाद ही रिपोर्ट मिल जाएगी. रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि संबंधित मरीज टीबी का संदिग्ध केस है या नहीं. इसके बाद ही उस मरीज को अस्पताल ले जाकर आगे की जांच प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी. विभाग इस मशीन का इस्तेमाल फिलहाल उन क्षेत्रों में करेगा, जहां मरीजों की संख्या अधिक है या फिर अस्पतालों में एक्स-रे सुविधा नहीं है. इस मशीन से रेडिएशन का भी कोई भी खतरा नहीं है.

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चरणबद्ध तरीके से भेजे संभावित मरीज
सीएमओ ने बताया कि जिला में टीबी स्क्रीनिंग अभियान तेजी से चल रहा है, लेकिन स्टाफ को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि एक्सरे और बलगम की जांच के लिए संभावित मरीजों को चरणबद्ध तरीके से भेजा जाए, ताकि ऐसा न हो कि विभाग की लैब के साथ-साथ एक्सरे मशीनरी पर अधिक दबाव पड़े.

Hitesh Sharma
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हितेश शर्मा 'आपकी बात न्यूज़ नेटवर्क' के संस्थापक और मुख्य संपादक हैं। दो दशकों से भी अधिक लंबे अपने करिअर में, वे 'अमर उजाला' 'दैनिक भास्कर' दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी और दिव्य हिमाचल जैसे प्रमुख प्रकाशनों में महत्वपूर्ण संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं। एक अनुभवी पत्रकार और पूर्व ब्यूरो प्रमुख के तौर पर, हितेश अपनी गहन ज़मीनी रिपोर्टिंग और नैतिक व प्रभावशाली पत्रकारिता के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए व्यापक रूप से सम्मानित हैं। वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग करने में विशेषज्ञता रखते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि हर कहानी को पूरी गहराई और ज़िम्मेदारी के साथ प्रस्तुत किया जाए।

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