शिमला/सिरमौर : हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ट्रांसगिरि यानि गिरिपार क्षेत्र के करीब ढाई लाख हाटी समुदाय के लोगों की नजरें अब हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर टिक गई हैं।
दरअसल, हाटी जनजाति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 26 अक्टूबर को अदालत में बहस पूरी हो चुकी है। केंद्रीय हाटी समिति को उम्मीद है कि मामले में जल्द निर्णय आएगा।
समिति ने राजनीतिक लाभ के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने से बचने और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है।
केंद्रीय हाटी समिति की लीगल कमेटी के अनुसार, पिछले करीब तीन वर्षों से यह मामला हाईकोर्ट शिमला में विचाराधीन है। समिति का कहना है कि जनजातीय दर्जे से जुड़े संवैधानिक अधिकार मिलने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया लंबित होने के कारण हाटी समुदाय के लोग इसके लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
समिति के मुताबिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अलग-अलग समय पर हाटी जनजाति कानून के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें केंद्र और राज्य सरकार को पक्षकार बनाया गया।
हाटी समुदाय के अधिकारों के लिए 1970 के दशक से संघर्ष कर रही केंद्रीय हाटी समिति भी कानूनी प्रक्रिया में पक्षकार बनी। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों के जवाबों के साथ समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व एडवोकेट जनरल अशोक शर्मा ने भी जवाब दाखिल किया।
प्रतिदिन सुनवाई के आवेदन के बाद तेज हुई कार्यवाही
समिति के अनुसार, सुनवाई में लगातार तारीखें मिलने और निर्णय में देरी से समुदाय के लोगों में निराशा बढ़ने लगी थी।
इसके बाद समिति के अधिवक्ता अशोक शर्मा ने हाईकोर्ट की खंडपीठ में मामले की प्रतिदिन सुनवाई करवाने के लिए आवेदन किया। समिति का कहना है कि अदालत ने इस आवेदन को स्वीकार किया, जिसके बाद सुनवाई में तेजी आई।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखा पक्ष
लीगल कमेटी के मुताबिक, इसके बाद समिति के सामने केंद्र सरकार की ओर से संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता की भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती थी।
इसके लिए समिति ने पूर्व विधायक बलदेव सिंह तोमर और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संपर्क किया।
समिति के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने नई दिल्ली से ऑनलाइन सुनवाई में हिस्सा लिया।
उन्होंने हाटी जनजाति कानून की संवैधानिक वैधता के पक्ष में तथ्य और तर्क रखे तथा अदालत से कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया।
फैसला सम्मान के साथ स्वीकार करेगी समिति
बहस पूरी होने के बाद केंद्रीय हाटी समिति ने मामले में सहयोग देने वाले सभी अधिवक्ताओं का आभार जताया है। समिति ने कहा कि हाईकोर्ट का जो भी निर्णय आएगा, उसे सम्मान के साथ स्वीकार किया जाएगा।
समिति ने यह भी अपील की है कि हाटी मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से कोई नेता या समर्थक सोशल मीडिया पर गलत जानकारी न फैलाएं और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें।
समिति के अनुसार, समय आने पर हाटी आंदोलन में योगदान देने वाले सभी लोगों के सहयोग को प्रामाणिकता के साथ सामने लाया जाएगा और उनका आभार भी व्यक्त किया जाएगा। केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डॉ. अमीचंद कमल ने ये जानकारी दी।

