कर्नल शेरजंग राष्ट्रीय पार्क सिंबलवाडा के लिए बनेगा जोनल मास्टर प्लान, मानव-हाथी संघर्ष में कमी लाने के निर्देश

डीसी सिरमौर सुमित खिमटा की अध्यक्षता में डीसी कार्यालय में भारत सरकार के मानव-वन्यजीव संघर्ष दिशा-निर्देश-2022 के तहत कर्नल शेरजंग राष्ट्रीय पार्क सिंबलवाड़ा के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार करने के मकसद से जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की आयोजित हुई. इस बैठक में जिले के सभी विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया.

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जोनल मास्टर प्लान

नाहन|
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड से हाथियों के आवागमन बढ़ा है. इसके चलते पांवटा साहिब, माजरा, गिरिनगर और कोलर आदि क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष में भी वृद्धि हुई है. इस गंभीर विषय को लेकर वन विभाग के डीएफओ पांवटा साहिब ऐश्वर्या राज ने जिला प्रशासन को अवगत कराया.

सोमवार को डीसी सिरमौर सुमित खिमटा की अध्यक्षता में डीसी कार्यालय में भारत सरकार के मानव-वन्यजीव संघर्ष दिशा-निर्देश-2022 के तहत कर्नल शेरजंग राष्ट्रीय पार्क सिंबलवाड़ा के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार करने के मकसद से जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की आयोजित हुई. इस बैठक में जिले के सभी विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया.

बैठक का संचालन करते हुए डीएफओ ऐश्वर्या राज ने डीसी को हाथी और वन्य जीव संरक्षण परियोजना के चरण के कार्यांवयन से अवगत करवाते हुए बताया कि सिरमौर में बाघ एक सीएसएस योजना है, जिसे हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024-25 से पहली बार क्रियांवित किया जा रहा है. इसमें संवेदनशील क्षेत्रों में एनाइडर प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की स्थापना, लूटपाट विरोधी दस्ते, प्रभावित क्षेत्रों में गज मित्रों की नियुक्ति, फील्ड स्टाफ के लिए सुरक्षा उपकरण, क्षमता निर्माण और समुदायों के साथ जागरूकता बैठकें आदि शामिल हैं.

डीसी ने विद्युत, पुलिस, कृषि ग्रामीण विकास, उद्योग विभागों को संघर्ष को कम करने और शमन उपायों के लिए वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिए. उन्होंने बिजली विभाग को ढीली बिजली लाइनों की मरम्मत, हाथी गलियारों में एमओईएफसीसी ट्रांसमिशन लाइनों के लिए सीईए सुरक्षा विनियमों और दिशानिर्देशों का कार्यांवयन करने को कहा.

साथ ही पुलिस विभाग को संघर्ष परिदृश्यों में भीड़ प्रबंधन के लिए, कृषि विभाग को राज्य राहत मैनुअल के अनुसार मुआवजे के लिए और फसल बीमा योजनाओं के अलावा सौर बाड़ लगाने के लिए जागरूकता शिविरों का आयोजन करने के निर्देश दिए. डीसी सुमित खिमटा ने सभी संबंधित विभागों को ईको-सेंसिटिव जोन, कर्नल शेर जंग नेशनल पार्क के जोनल मास्टर प्लान के लिए वन विभाग के साथ लिखित रूप में समन्वय करने का निर्देश भी दिए.