ददाहू : रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति के खैरी जोन की बैठक में विस्थापितों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई और चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों का समाधान नहीं हुआ तो बड़े आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।
बांध प्रभावित क्षेत्र अंटूबाग में संपन्न हुई बैठक में दर्जनों लोगों ने भाग लिया और खैरी जोन की नई कार्यकारिणी का भी गठन कर विभिन्न पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
बैठक में हिमालयन नीति अभियान (एचएनए) के संयोजक गुमान सिंह और विकास विशेष रूप से मौजूद रहे। गुमान सिंह ने कहा कि रेणुका डैम परियोजना का कार्य इतनी आसानी से शुरू नहीं हो सकता, क्योंकि परियोजना को अभी तक पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने विस्थापितों से संगठित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि एकजुटता से ही उनकी जायज मांगों को पूरा कराया जा सकेगा।
बैठक समिति के फाउंडर मेंबर विनोद ठाकुर और सलाहकार पूर्ण शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस दौरान हाउसलेस, लैंडलेस परिवारों और उन लोगों के मुद्दों पर भी चर्चा की गई, जिन्होंने पहले चरण में एचपीपीसीएल (HPPCL) के नाम अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवाई थी।
समिति का कहना है कि उस समय उन्हें 50 हजार रुपये प्रति बीघा की दर से भुगतान किया गया था और अंडरटेकिंग में यह भी उल्लेख था कि भविष्य में जमीन का रेट बढ़ने पर बढ़ी हुई राशि भी दी जाएगी, लेकिन आज तक इसका भुगतान नहीं किया गया।
इस दौरान प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने ये भी स्पष्ट किया कि बढ़ी हुई मुआवजा राशि समेत सभी लंबित मांगों के लिए भी लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि जल्द विस्थापितों की मांगें पूरी नहीं की गईं तो आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन का आयोजन किया जाएगा।
