अंब (ऊना) : करीब 15 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जतिंद्र कुमार की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर डेढ़-डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की सूरत में उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सजा पाने वालों में कांगड़ा निवासी केवल कृष्ण और रणजीत पठानिया, उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी दीपक कुमार, गाजियाबाद निवासी नितिन त्यागी और प्रवीन खुराना शामिल हैं। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला न्यायवादी शिखा राणा ने पैरवी की।
फर्जी चेक लगाकर निकाले थे लाखों
मामला सितंबर 2011 का है। पंजाब नेशनल बैंक की भरवाईं शाखा के तत्कालीन प्रबंधक ने इस संबंध में चिंतपूर्णी थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक संस्था के बैंक खाते में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम, आगरा के नाम से फर्जी चेक जमा करवाए और देहरा शाखा से करीब 29 लाख 50 हजार रुपये की रकम निकाल ली।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर उत्तरप्रदेश से फर्जी चेक तैयार करवाकर हिमाचल लाते थे और स्थानीय लोगों की मदद से विभिन्न बैंकों से रकम निकालते थे।
पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने पांचों को दोषी ठहराते हुए ये सजा सुनाई।
