शिमला : जिला परिषद और पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्यों की ‘एक दिन की वैल्यू’ संबंधी टिप्पणी को लेकर उठे राजनीतिक विवाद के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपनी सफाई दी है।
विपक्ष के निशाने पर आए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। उनका मकसद जनप्रतिनिधियों का अपमान करना नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति की एक वास्तविकता को सामने रखना था।
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका आशय यह था कि जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों की राजनीतिक अहमियत सबसे अधिक उस समय दिखाई देती है, जब चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनाव होने होते हैं।
वोटिंग से पहले विभिन्न पक्ष इन सदस्यों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं, उनकी खूब खातिरदारी की जाती है और उन्हें इधर-उधर घुमाया जाता है, लेकिन जैसे ही वोटिंग प्रक्रिया पूरी हो जाती है, वही सदस्य उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं। ये ट्रेंड बीजेपी करती है।
सुक्खू ने कहा कि ‘एक दिन की वैल्यू’ से उनका तात्पर्य केवल वोटिंग के दिन तक मिलने वाली राजनीतिक अहमियत से था, न कि जनप्रतिनिधियों के वास्तविक योगदान से।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की अपनी संवैधानिक और वित्तीय सीमाएं हैं। वे वित्त आयोग से मिलने वाली राशि के आधार पर अपनी पंचायतों में विकास कार्य करवाते हैं। ऐसे में उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान भाजपा पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में जिला परिषद, पंचायत समिति और प्रधान पदों के लिए कोई आधिकारिक उम्मीदवार घोषित नहीं किए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछली बार भाजपा के 11 जिला परिषद चेयरमैन थे, अब भाजपा कितनी जगहों पर चेयरमैन बनाने जा रही है, इसका जवाब भाजपा को देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस बार भाजपा ने 251 स्थानों पर अपने समर्थित उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे, जबकि कांग्रेस ने केवल नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम चुनावों के लिए उम्मीदवार घोषित किए थे। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन चुनावों के परिणामों को लेकर वह पहले ही अपनी बात स्पष्ट कर चुके हैं।
सुक्खू ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान किसी भी जिला परिषद या बीडीसी चेयरमैन को हटाने की कार्रवाई नहीं की है।
