नाहन : जिला सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र के हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है।
अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। गुर्जर समाज कल्याण परिषद सिरमौर के महासचिव सोमनाथ भाटिया ने उम्मीद जताई है कि फैसला गुर्जर समाज के पक्ष में आएगा।
हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के केंद्र सरकार के कानून को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं में गुर्जर समुदाय से संबंध रखने वाले लोग भी शामिल रहे, जिन्होंने ट्रांसगिरि क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे अदालत में चुनौती दी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में अनुसूचित जाति अधिकार संरक्षण समिति की ओर से भी हाटी आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।
याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क रहा है कि ट्रांसगिरि क्षेत्र अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता। इसी आधार पर केंद्र सरकार के कानून और इसके तहत दिए गए आरक्षण को चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे।
गुर्जर समाज कल्याण परिषद सिरमौर के महासचिव सोमनाथ भाटिया ने बताया कि हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने कहा कि गुर्जर समाज को न्यायालय के फैसले से उम्मीदें हैं और उन्हें विश्वास है कि फैसला समाज के पक्ष में आएगा।
फिलहाल, इस मामले में हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं। अदालत का फैसला आने के बाद ही हाटी जनजाति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

